बालोद। जिले के आदिवासी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बोरगांव में जिला खनिज न्यास (DMF) से स्वीकृत निर्माण कार्य में अनियमितता का मामला सामने आया है। वर्ष 2025 में बोरगांव हाई स्कूल में विद्यार्थियों के लिए साइकिल स्टैंड शेड एवं कांक्रीटीकरण कार्य हेतु 13 लाख 86 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे। इस कार्य की निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत बोरगांव को बनाया गया था।
आरोप है कि कार्य शुरू होने के बाद निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार पूरा नहीं किया गया, जबकि दस्तावेजों में इसे पूर्ण दर्शा दिया गया है। मौके पर लगाए गए सूचना बोर्ड में कार्य पूर्ण होने की तिथि 12 जून 2026 अंकित है, जबकि वर्तमान स्थिति में कार्य अधूरा बताया जा रहा है।
पुरानी दीवार पर निर्माण कार्य को लेकर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि साइकिल स्टैंड शेड का निर्माण पुरानी बाउंड्री वॉल पर सीमित कार्य करते हुए किया गया है। निर्माण में 14 कॉलम खड़े किए जाने और कांक्रीटीकरण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
ठेकेदार पर कार्य में हस्तक्षेप के आरोप
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि निर्माण कार्य में एक निजी ठेकेदार की भूमिका रही, जिसने कार्य को अपने स्तर पर संचालित किया। सरपंच का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान आपत्तियों के बावजूद कार्य आगे बढ़ाया गया और भुगतान प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।
सरपंच ने जताई आपत्ति
ग्राम पंचायत बोरगांव की सरपंच ने बताया कि उन्होंने पुरानी दीवार पर निर्माण कार्य को लेकर आपत्ति जताई थी, लेकिन इसके बावजूद कार्य जारी रहा। उन्होंने यह भी कहा कि कार्य अधूरा है और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है।
अन्य पंचायतों में भी उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि आदिवासी विकासखंड की कुछ अन्य पंचायतों में भी DMF से संबंधित कार्यों को लेकर इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं, जहां निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
जनपद सीईओ का बयान
मामले को लेकर जनपद सीईओ डी.डी. मांडले ने प्रारंभिक रूप से किसी अनियमितता से इनकार किया। हालांकि, दस्तावेज और मौके की स्थिति दिखाए जाने पर उन्होंने कहा कि यदि कार्य में गुणवत्ता की कमी पाई जाती है तो इसकी जांच कराई जाएगी तथा आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना होगा कि मामले की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।





