बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गांव के नजदीक भालू छोड़े जाने को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग के बीच विवाद की स्थिति बन गई। मरदेल गांव से करीब 500 मीटर दूर भालू छोड़े जाने की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और वन विभाग की तीन गाड़ियों को रोककर विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना था कि आबादी के इतने करीब भालू छोड़े जाने से लोगों की जान को खतरा हो सकता है।

जानकारी के मुताबिक, बालोद वन परिक्षेत्र के रानीमाई जंगल से एक अस्वस्थ भालू का रेस्क्यू किया गया था। इलाज के लिए उसे रायपुर स्थित जंगल सफारी भेजा गया। उपचार के बाद स्वस्थ होने पर वन विभाग की टीम सोमवार रात भालू को डौंडी वन परिक्षेत्र के मरदेल गांव के पास लेकर पहुंची और बस्ती से करीब 500 मीटर दूर जंगल में छोड़ दिया।

ग्रामीणों ने जताया सुरक्षा को लेकर डर

भालू छोड़े जाने की सूचना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा। संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने पर नाराजगी बढ़ गई। मौके पर पहुंचे जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी ने भी वन अधिकारियों से चर्चा की। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय रेंजर की गैरमौजूदगी को लेकर नारेबाजी भी की।

पिंजरा लगाकर दूसरे स्थान पर छोड़ा जाएगा भालू

मामला बढ़ने के बाद बालोद वन विभाग के SDO किशोरी साहू मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने लिखित आश्वासन दिया कि पिंजरा लगाकर भालू को दोबारा पकड़ा जाएगा और सुरक्षित दूसरे स्थान पर छोड़ा जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों का विरोध शांत हुआ।

सुरक्षा के मद्देनजर गांव में रात के समय पांच वनकर्मियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। वन विभाग ने ग्रामीणों से जंगल में अनावश्यक रूप से नहीं जाने और खासकर बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों को सतर्क रखने की अपील की है।