बालोद। डौंडी विकासखंड की ग्राम पंचायत बम्हनी के आश्रित ग्राम कटरेल में विकास कार्य के नाम पर ग्रामीणों से 45 हजार रुपये लेने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत की सरपंच निर्मला चुरेन्द्र पर करीब दो साल पहले चंदे के रूप में रकम लेने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पैसे देने के बावजूद गांव में न तो संबंधित विकास कार्य कराया गया और न ही उनकी रकम वापस की गई। नाराज ग्रामीणों ने डौंडी थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराते हुए मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।

विकास की उम्मीद में ग्रामीणों ने जुटाए थे 45 हजार रुपये

ग्रामीणों के अनुसार, कटरेल गांव चारों ओर जंगल से घिरा हुआ है और यहां लंबे समय से कई बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है। करीब दो साल पहले गांव में विकास कार्य कराने की बात सामने आने पर ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाया। आरोप है कि इस तरह एकत्र किए गए 45 हजार रुपये सरपंच निर्मला चुरेन्द्र को सौंपे गए थे।

ग्रामीणों को उम्मीद थी कि रकम देने के बाद गांव में विकास कार्य शुरू होगा और उनकी समस्याओं का समाधान होगा। आरोप है कि करीब दो साल गुजरने के बावजूद संबंधित काम शुरू नहीं हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने अपनी रकम वापस मांगी, लेकिन पैसे भी नहीं लौटाए गए।

शिकायत लेकर डौंडी थाने पहुंचे ग्रामीण

लंबे समय तक न काम होने और न ही रकम वापस मिलने से नाराज ग्रामीण सोमवार को डौंडी थाने पहुंचे। उन्होंने सरपंच के खिलाफ पुलिस को आवेदन सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

पुलिस ने ग्रामीणों की शिकायत लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि ग्रामीणों से रकम किस उद्देश्य से ली गई थी और उसका उपयोग कहां किया गया।

सरकारी राशि के बावजूद चंदा लेने पर उठे सवाल

मामला सामने आने के बाद पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली सरकारी राशि को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। डौंडी विकासखंड का यह इलाका आदिवासी बहुल होने के साथ खनन प्रभावित क्षेत्र में भी आता है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए विभिन्न सरकारी मदों से राशि उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में गांव के लोगों से विकास के नाम पर चंदा क्यों लिया गया, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि पंचायत के पास विकास कार्य कराने के लिए सरकारी योजनाओं और विभिन्न मदों से राशि उपलब्ध होती है तो उनसे 45 हजार रुपये किस आधार पर लिए गए। रकम किसी विशेष काम, स्वीकृति या अन्य उद्देश्य के लिए ली गई थी, यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।

थाने पहुंचीं सरपंच, बातचीत से नहीं निकला समाधान

मामले की जानकारी मिलने के बाद सरपंच निर्मला चुरेन्द्र भी थाने पहुंचीं। वहां ग्रामीणों और सरपंच के बीच बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। फिलहाल पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ग्रामीणों के आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे किसी तरह की कानूनी कार्रवाई की जाएगी या नहीं।