मोहला। जिले के अंबागढ़ चौकी थाना क्षेत्र के ग्राम भरीटोला में एक आदिवासी परिवार ने गांव के कुछ लोगों पर सामाजिक बहिष्कार और हुक्का-पानी बंद करने का गंभीर आरोप लगाया है। गोंड समाज से आने वाले शिवदर्शन नेताम का दावा है कि अपने वर्षों पुराने मकान को बचाने के लिए हाईकोर्ट और जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाने के बाद उनके परिवार के खिलाफ गांव में बैठक कर बहिष्कार का फैसला लिया गया।
पीड़ित परिवार ने मामले की शिकायत आजाक थाने में की है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
करीब 50 वर्षों से मकान में रहने का दावा
शिकायतकर्ता शिवदर्शन नेताम (50) का कहना है कि उनका परिवार करीब 50 वर्षों से सरकारी घास भूमि पर बने कच्चे मकान में रह रहा है। उनका आरोप है कि गांव के कुछ लोग उन्हें इस मकान से हटाना चाहते हैं।
अपने आवास को बचाने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट और कलेक्ट्रेट में आवेदन देकर लागू नियमों के तहत विस्थापन से संबंधित राहत और मकान के लिए पट्टा दिए जाने की मांग की है।
हाईकोर्ट जाने के बाद विवाद बढ़ने का आरोप
शिवदर्शन का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों को हाईकोर्ट और कलेक्ट्रेट में आवेदन दिए जाने की जानकारी मिलने के बाद एक बैठक बुलाई गई। उनका दावा है कि बैठक में उनके साथ गाली-गलौज की गई और परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने का कथित फैसला सुनाया गया।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि ग्रामीणों को उनसे दूरी बनाए रखने और उनका ‘हुक्का-पानी बंद’ करने के लिए कहा गया।
15 अगस्त को बहिष्कार किए जाने का दावा
परिवार के मुताबिक, 15 अगस्त को कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार का फैसला लिया गया। इसके बाद शिवदर्शन नेताम ने आजाक थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और प्रताड़ना, गाली-गलौज तथा सामाजिक बहिष्कार का आरोप लगाया।
हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन के पास मामला
जानकारी के मुताबिक, विस्थापन से जुड़े मामले में शिवदर्शन द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने स्थानीय जिला प्रशासन को नियमानुसार उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद प्रकरण कलेक्ट्रेट स्तर पर निर्णय के लिए अपर कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
परिवार का कहना है कि एक ओर वह अपने मकान को बचाने के लिए कानूनी प्रक्रिया के जरिए न्याय मांग रहा है, वहीं दूसरी ओर उसे गांव में कथित सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी जमीन पर दूसरे मकान होने का भी दावा
शिवदर्शन नेताम ने दावा किया है कि भरीटोला गांव में कई अन्य लोगों के मकान भी सरकारी घास भूमि पर बने हुए हैं। इसके बावजूद केवल उनके परिवार को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया गया है।
परिवार का कहना है कि गांव के कुछ लोगों से समझौता करने के बजाय अदालत और प्रशासन के पास जाने के कारण उन्हें कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है।
पुलिस ने शुरू की शिकायत की जांच
आजाक थाना प्रभारी ईश्वर ध्रुव के मुताबिक, परिवार की शिकायत प्राप्त हुई है और मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।





