भिलाई। दुर्ग जिले के भिलाई में एक डीएसपी को कथित रूप से झूठे मामले में फंसाने और बार-बार भ्रामक शिकायतें करने के आरोप में कंपनी के तीन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सुपेला थाना पुलिस ने यह कार्रवाई दुर्ग के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत के आदेश के बाद की है। आरोपियों में कंपनी के प्रबंध निदेशक समेत सतनाम सिंह, विभूति भूषण बाबू और श्रीराम गुप्ता शामिल हैं। इन पर आपसी मिलीभगत से आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोप है।
स्कॉर्पियो वाहन के विवाद से शुरू हुआ मामला
मामले की शुरुआत एक स्कॉर्पियो वाहन को लेकर हुई शिकायत से हुई थी। कंपनी के अधिकृत अधिकारी सतनाम सिंह ने 13 अक्टूबर 2025 को जामुल थाने में शिकायत की थी कि वाहन डीएसपी ने वापस नहीं किया। इसके बाद वाहन के मूल मालिक अंकित सिंह ने भी 7 नवंबर 2025 को शिकायत दी। पुलिस जांच में कंपनी और वाहन मालिक के बीच लेनदेन से जुड़ा विवाद सामने आया और जांच के बाद जामुल थाना पुलिस ने संज्ञेय अपराध बनना नहीं पाया।
जांच का निष्कर्ष छिपाकर दोबारा शिकायत का आरोप
आरोप है कि पहले की जांच के निष्कर्ष की जानकारी होने के बावजूद अधिकारियों ने 27 मई को पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और जामुल थाने में फिर शिकायत की। इसके बाद 14 जुलाई को सुपेला थाने में भी शिकायत दी गई।
दूसरी ओर डीएसपी ने अपने खिलाफ साजिश का आरोप लगाते हुए पुलिस महानिदेशक, पुलिस अधीक्षक और मुख्यमंत्री के ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत की थी। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने अदालत का रुख किया।
कोर्ट ने FIR दर्ज कर जांच के दिए आदेश
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 11 सितंबर को दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया मिथ्या सूचना देने, झूठी शिकायत व साक्ष्य तैयार करने, लोक सेवक के काम में बाधा डालने, नुकसान पहुंचाने की नीयत से झूठा आरोप लगाने, छल और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े अपराध बनते पाए।
इसके बाद सुपेला थाना प्रभारी को तीनों आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया गया।
पुलिस ने अदालत के निर्देश पर मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।





