जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के लिए यह गर्व का क्षण है। बस्तर की विश्वप्रसिद्ध ढोकरा (बेलमेटल) कला को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को बस्तर के कारीगरों द्वारा तैयार की गई पारंपरिक ‘ट्री ऑफ लाइफ’ (जीवन वृक्ष) शिल्पकृति भेंट की। इस विशेष उपहार ने न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया, बल्कि बस्तर के शिल्पकारों की अद्भुत कला को भी वैश्विक पहचान दिलाई।


हजारों वर्षों पुरानी है ढोकरा कला

ढोकरा कला, जिसे बेलमेटल कला भी कहा जाता है, भारत की सबसे प्राचीन धातु शिल्प परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसका इतिहास करीब 3,000 वर्ष पुराना बताया जाता है। आज भी बस्तर के कारीगर इस कला को पारंपरिक ‘लॉस्ट वैक्स कास्टिंग’ (Lost Wax Casting) तकनीक से तैयार करते हैं, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा गया है।


ऐसे तैयार होती है अनूठी शिल्पकृति

ढोकरा शिल्प तैयार करने की प्रक्रिया बेहद जटिल और मेहनतभरी होती है। सबसे पहले मधुमक्खी के मोम से शिल्प का मॉडल तैयार किया जाता है। इसके बाद उस पर विशेष प्रकार की मिट्टी की कई परतें चढ़ाई जाती हैं। फिर सांचे को गर्म करने पर मोम पिघलकर बाहर निकल जाता है और उसकी जगह पर पिघला हुआ पीतल और अन्य धातुओं का मिश्रण डाला जाता है। ठंडा होने के बाद मिट्टी हटाई जाती है और महीन नक्काशी व फिनिशिंग के जरिए आकर्षक शिल्पकृति तैयार की जाती है।


'ट्री ऑफ लाइफ' का विशेष महत्व

प्रधानमंत्री द्वारा भेंट की गई ‘ट्री ऑफ लाइफ’ शिल्पकृति भारतीय संस्कृति में जीवन, प्रकृति, समृद्धि, संतुलन और निरंतर विकास का प्रतीक मानी जाती है। यह कलाकृति मानव और प्रकृति के गहरे संबंध को दर्शाती है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है।


बस्तर के कारीगरों के लिए गर्व का अवसर

प्रधानमंत्री द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस शिल्पकृति को उपहार स्वरूप प्रस्तुत किए जाने से बस्तर के कारीगरों में खुशी का माहौल है। उनका मानना है कि इससे स्थानीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी और ढोकरा कला से जुड़े शिल्पकारों के लिए रोजगार एवं निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे।


'वोकल फॉर लोकल' को मिली नई मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व नेताओं को भारत की पारंपरिक हस्तकलाओं को उपहार में देना 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' जैसी पहलों को भी मजबूती देता है। इससे भारतीय हस्तशिल्प और जनजातीय कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों को आर्थिक लाभ भी मिलने की उम्मीद है।


बस्तर की कला ने बढ़ाया देश का मान

बस्तर की ढोकरा कला अपनी बारीक नक्काशी, पारंपरिक तकनीक और सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। प्रधानमंत्री द्वारा इसे न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री को भेंट किए जाने से न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए यह गौरव का विषय बन गया है। यह सम्मान स्थानीय शिल्पकारों की वर्षों की मेहनत और उनकी अनमोल कला को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।