कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मलेरिया के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले 10 दिनों के भीतर दो आदिवासी छात्रों की मलेरिया से मौत हो चुकी है। दोनों छात्र आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। लगातार हो रही इन मौतों के बाद विभाग और छात्रावास प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मलेरिया से छात्र की उपचार के दौरान मौत
जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र मरदापोटी बालक आवासीय आश्रम का निवासी था। उसकी 24 जुलाई को मलेरिया जांच पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद उसे निर्धारित दवा दी गई। तबीयत बिगड़ने पर उसे कांकेर के मातृत्व एवं शिशु अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
10 दिनों में दूसरी मौत से बढ़ी चिंता
यह जिले में महज 10 दिनों के भीतर मलेरिया से दूसरे आदिवासी छात्र की मौत है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने छात्रावासों में स्वास्थ्य सुविधाओं, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दो अन्य छात्र भी अस्पताल में भर्ती
बताया जा रहा है कि मरदापोटी बालक आश्रम के दो अन्य छात्र भी मलेरिया से संक्रमित हैं और उनका इलाज मातृत्व एवं शिशु अस्पताल में चल रहा है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।
विभागीय लापरवाही के आरोप
लगातार हो रही मौतों के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
स्वास्थ्य जांच और मलेरिया नियंत्रण की मांग
घटना के बाद छात्रावासों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, मच्छर नियंत्रण अभियान और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी छात्रावासों में विशेष स्वास्थ्य निगरानी और मलेरिया नियंत्रण के प्रभावी इंतजाम किए जाने चाहिए।





