जगदलपुर। जिस अस्पताल में मरीज इलाज और राहत की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं अगर गंदगी और संक्रमण का खतरा उनका इंतजार कर रहा हो, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। बस्तर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डिमरापाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जहां टॉयलेट का गंदा पानी वार्डों और गलियारों तक फैल गया। इससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।
कम क्षमता वाली पाइपलाइन बनी बड़ी समस्या
बताया जा रहा है कि अस्पताल निर्माण के समय वर्ष 2018 में जरूरत के मुकाबले कम क्षमता की पाइपलाइन बिछाई गई थी। समय के साथ मरीजों की संख्या बढ़ती गई, लेकिन सीवरेज व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। यही वजह है कि अब पाइपलाइन बार-बार जाम होने लगी है और गंदा पानी अस्पताल के अंदर फैल रहा है।
हैरानी की बात यह है कि अस्पताल की सीवरेज और मरम्मत व्यवस्था सुधारने के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर स्वीकृत राशि खर्च होने के बाद भी व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं दिखाई दे रहा।
अधीक्षक ने खुद संभाली सफाई की कमान
स्थिति बिगड़ने के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू को खुद मौके पर उतरना पड़ा। उन्होंने कर्मचारियों के साथ मिलकर करीब दो घंटे तक ग्राउंड फ्लोर और प्रभावित क्षेत्रों की सफाई करवाई। वहीं पीडब्ल्यूडी विभाग की गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मरीज बोले- इलाज कराने आए हैं, बीमारी लेने नहीं
अस्पताल पहुंचे लोगों ने व्यवस्था पर नाराजगी जताई। नूर मोहम्मद शेख ने बताया कि वार्ड तक जाने वाले रास्तों में टॉयलेट का गंदा पानी फैला हुआ था। मरीजों और परिजनों को बदबू और गंदगी के बीच से गुजरना पड़ रहा था।
वहीं ईश्वर बघेल ने कहा कि अस्पताल में ऐसी स्थिति मरीजों को ठीक करने के बजाय उन्हें और बीमार कर सकती है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुरेन सिन्धा ने भी अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए तत्काल सुधार की मांग की है।
सीवरेज का गंदा पानी बढ़ा सकता है संक्रमण का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अस्पताल का सीवरेज सामान्य गंदा पानी नहीं होता। इसमें कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया और संक्रमण फैलाने वाले तत्व मौजूद हो सकते हैं। इसके संपर्क में आने से कमजोर मरीजों में संक्रमण, सेप्सिस, पीलिया और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
सबसे बड़े अस्पताल की व्यवस्था पर बड़ा सवाल
बस्तर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में ऐसी स्थिति सामने आना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। करोड़ों रुपये के बजट और बड़ी इमारत के बावजूद अगर मरीजों को गंदगी और संक्रमण के खतरे के बीच इलाज कराना पड़े, तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
अब सवाल यही है कि क्या डिमरापाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल इलाज का केंद्र बना रहेगा या लापरवाही के कारण संक्रमण का नया ठिकाना बन जाएगा?





