दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में CIBIL स्कोर सुधारने और आसानी से लोन दिलाने का झांसा देकर कथित धोखाधड़ी का मामला लगातार बड़ा होता जा रहा है। पद्मनाभपुर थाने में दर्ज इस मामले में अब तक करीब 150 पीड़ितों की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इनमें दुर्ग के साथ बालोद और बेमेतरा जिले के लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।
आरोप है कि गिरोह लोगों को CIBIL स्कोर बेहतर करने, कम किस्त में लोन दिलाने, कमीशन और अतिरिक्त कमाई का लालच देता था। इसके बाद उनके दस्तावेजों के आधार पर AC और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराया जाता और सामान आरोपियों के पास चला जाता था। शुरुआत में कुछ किस्तें जमा करने के बाद EMI का भुगतान बंद कर दिया जाता था, जिससे लोन का बोझ संबंधित व्यक्ति पर आ जाता था।
मूक-बधिर युवक की शिकायत के बाद खुला मामला
मामले का खुलासा एक मूक-बधिर युवक की शिकायत के बाद हुआ। पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए उन इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों और फाइनेंस कंपनियों से भी जानकारी जुटानी शुरू की है, जहां से कथित तौर पर पीड़ितों के नाम पर सामान फाइनेंस कराया गया था।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने कितने लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और कुल कितनी राशि का फाइनेंस कराया गया।
CIBIL स्कोर बढ़ाने और कमीशन का दिया था लालच
पुलिस के मुताबिक, 20 अगस्त 2026 को रायपुर निवासी मनीष कुमार पांडे (36) अपने भाई शुभम पांडे के साथ पद्मनाभपुर थाने पहुंचे थे। मनीष मूक-बधिर हैं, इसलिए शिकायत दर्ज कराने में उनके भाई ने उनकी मदद की।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि शेखर देशमुख, अनुराग देशमुख और ऋषभ शर्मा ने CIBIL स्कोर बेहतर करने और कमीशन दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद महाराजा चौक स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान से मनीष के नाम पर AC फाइनेंस कराया गया।
44,600 रुपये का फाइनेंस, AC ले गए आरोपी
पीड़ित के मुताबिक, उसके नाम पर होम क्रेडिट के जरिए करीब 44,600 रुपये का आठ महीने का फाइनेंस कराया गया। आरोप है कि फाइनेंस की प्रक्रिया के दौरान उसका मोबाइल भी आरोपियों के पास था।
फाइनेंस पूरा होने के बाद AC आरोपी अपने साथ ले गए। शुरुआत में कुछ समय तक किस्तें जमा की गईं, लेकिन बाद में EMI का भुगतान बंद हो गया। इसके बाद फाइनेंस कंपनी ने बकाया राशि के लिए मनीष से संपर्क करना शुरू किया।
पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों से कई बार संपर्क करने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते उसे कुछ किस्तें खुद जमा करनी पड़ीं।
सवाल करने पर धमकी देने का भी आरोप
शिकायत में पीड़ितों को धमकाने के आरोप भी लगाए गए हैं। आरोप है कि जब लोगों ने अपने नाम पर लिए गए लोन और इलेक्ट्रॉनिक सामान को लेकर सवाल किए तो उन्हें धमकाया गया।
कुछ लोगों से कथित तौर पर दबाव बनाकर लोन की रकम का सेटलमेंट कराने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इन आरोपों की पुष्टि विवेचना पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
100 से बढ़कर करीब 150 पहुंची पीड़ितों की संख्या
इस मामले में शिकायतकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। करीब एक महीने पहले तक 100 से अधिक शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन अब यह आंकड़ा करीब 150 तक पहुंच गया है।
पुलिस सभी शिकायतों का मिलान कर रही है। यह जांच की जा रही है कि कितने लोगों के नाम पर लोन लिया गया, कितने इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराए गए और पूरे मामले में कुल कितनी रकम का लेन-देन हुआ।
डिजिटल लेन-देन, मोबाइल और फाइनेंस से संबंधित दस्तावेजों समेत अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
मुख्य आरोपी ऋषभ शर्मा ने किया था सरेंडर
मामले में मुख्य आरोपी के रूप में सामने आए ऋषभ शर्मा ने 24 जुलाई को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की।
जांच के दौरान बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड, पासबुक, चेकबुक और मोबाइल खरीद से संबंधित दस्तावेज जब्त किए जाने की जानकारी है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।





