दुर्ग। साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिले में 3,162 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की पहचान की है। इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराध और ऑनलाइन सट्टे से जुड़े लेनदेन में किया गया था। पुलिस ने अलग-अलग मामलों में अब तक 63 एफआईआर दर्ज कर 257 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।


1,494 बैंक खातों पर कार्रवाई जारी

पुलिस जांच में सामने आए हजारों संदिग्ध बैंक खातों में से 1,494 खातों पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। बैंकिंग लेनदेन और खातों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि इनका इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों और अवैध ऑनलाइन सट्टे के नेटवर्क में किया गया।


म्यूल अकाउंट के जरिए घूमाई जाती थी ठगी की रकम

साइबर अपराधी अक्सर ठगी की रकम को सीधे अपने खातों में लेने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों को आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है। पुलिस के अनुसार, कई मामलों में कमीशन या पैसे के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराए जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में खाताधारक खुद भी ठगी के नेटवर्क से जुड़े पाए जाते हैं।


63 मामलों में दर्ज हुई एफआईआर

साइबर अपराध और ऑनलाइन सट्टे से जुड़े मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने अब तक 63 एफआईआर दर्ज की हैं। इन मामलों में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल भुगतान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कार्रवाई की गई।


257 आरोपियों की गिरफ्तारी

पुलिस ने अभियान के दौरान अब तक 257 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां संदिग्ध खातों से हुए लेनदेन की कड़ियां जोड़कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हैं।


बैंक खाते किराए पर देने वालों पर भी नजर

पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, मोबाइल नंबर, सिम या ऑनलाइन बैंकिंग की जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को न दें। यदि किसी खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी या ऑनलाइन सट्टे के लिए होता पाया जाता है, तो खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।

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