बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रायपुर के बहुचर्चित हत्या और लूटकांड से जुड़े मामले में ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट और उसके लॉजिस्टिक पार्टनर के अधिकारियों को राहत देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द (Quash) करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि जब प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध के तत्व सामने आते हैं, तब जांच या ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
क्या है पूरा मामला?
मामला जुलाई 2025 का है, जब रायपुर के मंदिर हसौद थाना क्षेत्र में हत्या और लूट की एक सनसनीखेज घटना सामने आई थी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट के माध्यम से मंगवाया था।
पुलिस का आरोप है कि चाकू की डिलीवरी और बिक्री की प्रक्रिया में आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद पुलिस ने फ्लिपकार्ट और उसके लॉजिस्टिक पार्टनर इलास्टिक रन (Elastic Run) से जुड़े मैनेजर, डिस्ट्रीब्यूटर सहित कुल छह कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था।
हाई कोर्ट में क्या दलील दी गई?
फ्लिपकार्ट और उसके अधिकारियों की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया कि—
- उनका घटना में कोई प्रत्यक्ष या आपराधिक संबंध नहीं है।
- केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पाद की बिक्री होने के आधार पर आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।
- इसलिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को निरस्त किया जाए।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
हाई कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि—
- रिकॉर्ड में प्रथम दृष्टया ऐसे तथ्य मौजूद हैं, जिनकी विस्तृत जांच और परीक्षण ट्रायल के दौरान होना चाहिए।
- इस स्तर पर अदालत सबूतों का मूल्यांकन नहीं कर सकती।
- यदि संज्ञेय अपराध के प्रारंभिक तत्व मौजूद हैं, तो एफआईआर या चार्जशीट को केवल असाधारण परिस्थितियों में ही रद्द किया जा सकता है।
- जांच और ट्रायल की प्रक्रिया को बीच में रोकना न्यायोचित नहीं होगा।
मामले की जांच और ट्रायल जारी रहेगा
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद फ्लिपकार्ट और उसके लॉजिस्टिक पार्टनर से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट प्रभावी रहेगी। अब मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगी, जहां उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोष या निर्दोष होने का फैसला किया जाएगा।
फैसले का महत्व
यह फैसला ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनियों और उनके लॉजिस्टिक नेटवर्क की जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि हाई कोर्ट ने किसी को दोषी नहीं ठहराया है, लेकिन स्पष्ट किया है कि जहां प्रथम दृष्टया अपराध के तत्व मौजूद हों, वहां जांच और न्यायिक प्रक्रिया को पूरा होने देना आवश्यक है। अब इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।





