दुर्ग। साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों के खिलाफ दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सुपेला पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने बैंक खातों की जांच, तकनीकी साक्ष्यों और लेनदेन के विश्लेषण के आधार पर छह खाताधारकों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन लोगों ने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते और उससे जुड़े दस्तावेज दूसरे लोगों को उपलब्ध कराए थे।
2 हजार से 15 हजार रुपये तक कमीशन लेने का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड करीब 2 हजार से 15 हजार रुपये तक के कमीशन या अन्य आर्थिक लाभ के बदले दूसरों को दिए थे। इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया गया।
लाखों रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन
पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान संबंधित बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। मामले की जांच सुपेला थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध क्रमांक 679/2026 के आधार पर की जा रही थी। इसी दौरान खातों की गतिविधियों में गड़बड़ी सामने आई।
ये छह खाताधारक गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में दिनेश सोना (22), हेमंत कुमार मिश्रा (37), मोहम्मद आरिफ (30), वीरेंद्र विश्वकर्मा (34), अखिलेश गुप्ता (55) और रीना देवी के खिलाफ कार्रवाई की है। सभी पर बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
पासबुक, ATM कार्ड और मोबाइल जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। अब इन दस्तावेजों और बैंक लेनदेन के आधार पर साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
पुलिस ने लोगों से की सावधान रहने की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के आर्थिक लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक या सिम कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। यदि इनका इस्तेमाल साइबर अपराध में होता है तो खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
साइबर ठगी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है।





