मोहला। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में जरूरतमंद और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में दो महत्वपूर्ण पहल सामने आई हैं। एक ओर जिले में पहली बार फॉस्टर केयर के जरिए एक बेसहारा बालक को परिवार का सुरक्षित और स्नेहपूर्ण माहौल मिला है, वहीं दूसरी ओर नक्सल हिंसा से प्रभावित पांच परिवारों के पात्र सदस्यों को शासकीय सेवा में नियुक्ति दी गई है। दोनों पहल को प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
ढाबे से रेस्क्यू किए गए बालक को मिला परिवार
जिले में 1 से 30 जून 2026 तक विषम परिस्थितियों में रह रहे बच्चों की पहचान, रेस्क्यू और पुनर्वास के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। इसी दौरान श्रम विभाग, पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम ने एक स्थानीय ढाबे से एक बालक को रेस्क्यू किया। जांच में सामने आया कि बालक के माता-पिता के साथ दादा-दादी का भी निधन हो चुका है। इसके बाद उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कर संरक्षण के लिए बालगृह भेजा गया।
बालगृह में काउंसलिंग के दौरान बालक ने संस्थागत देखरेख के बजाय परिवार के बीच रहने की इच्छा जताई। इसके बाद जिला बाल संरक्षण इकाई ने उसके दूर के रिश्तेदारों से संपर्क किया। काउंसलिंग के बाद रिश्तेदार बालक की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हो गए।
कानूनी प्रक्रिया पूरी कर परिवार को सौंपा
संभावित पोषण परिवार का गृह अध्ययन, साक्षात्कार और पात्रता सत्यापन किया गया। बालक का आधार कार्ड बनवाने के साथ अन्य जरूरी दस्तावेज और कानूनी औपचारिकताएं भी पूरी की गईं। बाल कल्याण समिति की अनुशंसा और जिला प्रशासन की मंजूरी के बाद बालक को फॉस्टर केयर के तहत परिवार को सौंप दिया गया। अब वह परिवार के साथ रहकर नियमित रूप से स्कूल भी जा रहा है।
पांच नक्सल पीड़ित परिवारों को मिला रोजगार का सहारा
इसी जिले में नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में भी बड़ी पहल की गई है। नक्सल पुनर्वास नीति के तहत पांच पीड़ित परिवारों के पात्र सदस्यों को सरकारी नौकरी दी गई है। कलेक्टर तनुजा सलाम ने नवनियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
नियुक्ति पाने वालों में रवि दुग्गा, अजय कुमार सलामे, दिलसाय कोरेटी, समीला पूड़ो और पायल ईश्वर पूड़ो शामिल हैं। इन सभी को आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावास और आश्रमों में भृत्य पद पर नियुक्ति दी गई है।
रोजगार से परिवारों को मिलेगी आर्थिक मजबूती
सरकारी नौकरी मिलने से नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को नियमित आय के साथ आर्थिक स्थिरता मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का उद्देश्य ऐसे परिवारों को पुनर्वास का अवसर देकर आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
कलेक्टर तनुजा सलाम ने नवनियुक्त कर्मचारियों से पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने को कहा। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवा रोजगार के साथ समाज और शासन के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी अवसर है।
जिले में सामने आई ये दोनों पहल पुनर्वास के दो अलग-अलग पहलुओं को दर्शाती हैं। फॉस्टर केयर के जरिए जहां एक बच्चे को परिवार, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य का आधार मिला है, वहीं सरकारी नियुक्ति से नक्सल प्रभावित पांच परिवारों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह खुली है।





