रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर सरकार से अहम सवाल किए गए। प्रश्नकाल के दौरान विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े ने स्कूल शिक्षा विभाग से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद क्या राज्य सरकार शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने के लिए कोई नई नीति बनाने पर विचार कर रही है।
विधायक ने राज्य में TET परीक्षा के आयोजन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकार की आगामी रणनीति को लेकर भी जानकारी मांगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का होगा पालन: शिक्षा मंत्री
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विधानसभा में जवाब देते हुए कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार न्यायालय के आदेशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई करेगी।
Review Petition पर सरकार ने दिया स्पष्ट जवाब
विधायक ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल की है। इस पर शिक्षा मंत्री ने साफ किया कि सरकार की ओर से अब तक ऐसी कोई पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की गई है।
साल में दो बार TET कराने का मुद्दा भी उठा
विधानसभा में यह सवाल भी उठाया गया कि राष्ट्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी साल में दो बार परीक्षा क्यों नहीं आयोजित की जाती।
इस पर मंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षकों की आवश्यकता और परिस्थितियों के आधार पर ही TET परीक्षा आयोजित की जाती है।
विभागीय स्तर पर TET कराने की कोई योजना नहीं
विधायक ने यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार विभागीय स्तर पर सीमित TET परीक्षा आयोजित कर पात्रता अंकों में छूट देने की कोई व्यवस्था बनाने जा रही है।
जवाब में शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार के पास फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। इसलिए विभागीय स्तर पर अलग से TET कराने या पात्रता में विशेष छूट देने का प्रश्न ही नहीं उठता।
विधानसभा में हुई इस चर्चा के बाद यह साफ हो गया है कि राज्य सरकार फिलहाल TET अनिवार्यता को लेकर कोई नई छूट या राहत नीति लाने के पक्ष में नहीं है। सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ही आगे निर्णय लेगी।




