नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से पहले आम लोगों को महंगाई का एक और झटका लगा है। देश के कई शहरों में चीनी की खुदरा कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पिछले कुछ हफ्तों में 50 से 55 रुपये प्रति किलो के आसपास बिकने वाली चीनी का भाव कई स्थानों पर 70 रुपये प्रति किलो के करीब या उससे ऊपर पहुंचने का दावा किया गया है।

चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से विभिन्न स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। थोक बाजार में इनका कुछ असर दिखाई देने की बात कही जा रही है, लेकिन खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को अभी अपेक्षित राहत नहीं मिली है। ऐसे में त्योहारों से पहले घरों का बजट प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।


तीन हफ्तों में 16 से 18 रुपये तक बढ़ने का दावा

चीनी बाजार से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, 1 अगस्त से 22 अगस्त 2026 के बीच देश के कई शहरों में चीनी की खुदरा कीमत में करीब 16 से 18 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि का दावा किया गया है।

22 अगस्त को दिल्ली में चीनी का खुदरा भाव करीब 68 रुपये प्रति किलो, कानपुर में 69 रुपये, रायपुर और मुंबई में 68 रुपये, जबकि रांची और कोलकाता में करीब 70 रुपये प्रति किलो बताया गया। गुवाहाटी में भाव 71 रुपये, जबकि हैदराबाद और चेन्नई में करीब 70 रुपये प्रति किलो तक बताए गए।


महीने की शुरुआत में 50-55 रुपये के आसपास था भाव

आंकड़ों के अनुसार, अगस्त की शुरुआत में इन शहरों में चीनी की कीमत काफी कम थी। 1 अगस्त को दिल्ली, कानपुर और रायपुर में चीनी का खुदरा भाव करीब 52 रुपये प्रति किलो था। मुंबई में यह करीब 51 रुपये, रांची में 52 रुपये और कोलकाता में करीब 53 रुपये प्रति किलो बताया गया।

इसी तरह गुवाहाटी में महीने की शुरुआत में चीनी करीब 53 रुपये, हैदराबाद में 52 रुपये और चेन्नई में लगभग 54 रुपये प्रति किलो के आसपास बताई गई थी।


त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता

आने वाले त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में कीमतों में तेजी से आम उपभोक्ताओं के साथ मिठाई कारोबारियों और छोटे व्यापारियों की लागत भी बढ़ सकती है।


कब सस्ती होगी चीनी?

चीनी की कीमतों में कब तक कमी आएगी, इसे लेकर फिलहाल निश्चित समय बताना मुश्किल है। खुदरा भाव आगे आपूर्ति, मांग, सरकारी हस्तक्षेप और थोक बाजार की कीमतों पर निर्भर करेगा। थोक स्तर पर कीमतों में नरमी का असर खुदरा बाजार तक पहुंचता है तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।

फिलहाल तेजी से बढ़ी कीमतों ने घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है और उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि त्योहारों से पहले चीनी के दाम नीचे आते हैं या नहीं।