रायपुर। निराश्रित और आवारा मवेशियों के संरक्षण के उद्देश्य से शुरू की गई राज्य सरकार की योजना अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। योजना शुरू होने के लगभग एक वर्ष बाद भी बड़ी संख्या में गौ-आश्रय केंद्र तैयार नहीं हो पाए हैं। ऐसे में ढाई लाख से अधिक बेसहारा मवेशी अब भी सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों में घूम रहे हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और किसानों की फसलों को नुकसान जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।


1,460 गौ-आश्रय केंद्र का लक्ष्य, अब तक केवल 42 संचालित

सरकार ने प्रदेशभर में 1,460 गौ-आश्रय केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा था, ताकि निराश्रित मवेशियों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि अब तक केवल 42 केंद्र ही संचालित हो पाए हैं, जिनमें करीब 5,019 मवेशियों को रखा गया है। इसके अलावा 151 केंद्रों को प्रशासनिक स्वीकृति और 88 का पंजीयन हो चुका है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर निर्माण और संचालन अभी प्रारंभिक चरण में है।


मौजूदा गोठानों को किया जा रहा विकसित

पशुधन विकास विभाग के अनुसार, योजना के पहले चरण में राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास स्थित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। पहले से मौजूद गोठानों को विकसित कर उन्हें स्थायी आश्रय केंद्रों के रूप में तैयार किया जा रहा है। इन स्थानों पर पहले से बाउंड्री, शेड, पेयजल और बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से निर्माण कार्य में समय और लागत कम होने की संभावना है।


हर विकासखंड में 10 केंद्र बनाने का लक्ष्य

योजना के तहत प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 10 गौ-आश्रय केंद्र तथा नगर निगम क्षेत्रों में 25-25 केंद्र विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग का कहना है कि आगामी दो वर्षों में निर्माण कार्यों में तेजी लाकर निर्धारित लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया जाएगा।


निर्माण और संचालन के लिए आर्थिक सहायता

राज्य सरकार प्रत्येक केंद्र के निर्माण के लिए 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। इस राशि का उपयोग पशु शेड, चारा विकास, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास में किया जाएगा। साथ ही मवेशियों की देखभाल और रखरखाव के लिए भी आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।


चार नए गो-अभयारण्य विकसित करने की योजना

राज्य में चार नए गो-अभयारण्य विकसित करने की भी योजना बनाई गई है। सरकार का उद्देश्य निराश्रित मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और किसानों की फसलों को आवारा पशुओं से होने वाले नुकसान से बचाना है।