रायपुर। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से ईओडब्ल्यू-एसीबी की पूछताछ को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष और सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि तीन वर्षों तक फरार रहने के बाद गिरफ्तारी के बावजूद जांच एजेंसी अब तक कोई बड़ा खुलासा सार्वजनिक नहीं कर सकी है। इसे लेकर विभिन्न तरह की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि जिन मुद्दों को भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान प्रमुखता से उठाया था, उनमें कथित महादेव सट्टा एप, शराब घोटाला, कोयला, कस्टम मिलिंग और डीएमएफ से जुड़े मामलों की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचनी चाहिए। हालांकि जांच एजेंसी का कहना है कि पूछताछ लगातार जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

इसी बीच सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में रामगोपाल अग्रवाल को पूछताछ के दौरान विशेष सुविधाएं मिलने संबंधी दावे भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ईओडब्ल्यू-एसीबी ने केवल इतना कहा है कि पूछताछ नियमानुसार जारी है और जांच के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसी रामगोपाल अग्रवाल की फरारी के दौरान उनके ठिकानों और गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है। एजेंसी विदेश में उनके रहने संबंधी तथ्यों की जांच भी कर रही है। वहीं उनके पुत्र वैभव अग्रवाल ने जांच एजेंसी को दिए बयान में दावा किया है कि उनके पिता छत्तीसगढ़ से बाहर नहीं गए थे और अधिकांश समय धमतरी में रहे। हालांकि जांच एजेंसी इस दावे का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कर रही है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के एक आरोपी के समर्थन में आंदोलन कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है और पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। उनके अनुसार अंतिम निर्णय न्यायालय करेगा।

डॉ. मिश्रा ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कथित लेवी, राइस मिलिंग और शराब कारोबार से जुड़े आर्थिक लेन-देन के दस्तावेज तथा डिजिटल रिकॉर्ड जांच एजेंसियों के पास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है।

भाजपा ने कांग्रेस के रुख पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी से पहले तक रामगोपाल अग्रवाल को पार्टी का कोषाध्यक्ष बताया जाता था, जबकि गिरफ्तारी के बाद कुछ नेताओं ने उनसे दूरी बनाने की कोशिश की। दूसरी ओर कांग्रेस उनके समर्थन में विरोध-प्रदर्शन कर रही है, जिसे भाजपा ने विरोधाभासी रुख बताया है।

उधर, कांग्रेस की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और कानून अपना काम करे।

गौरतलब है कि ईओडब्ल्यू-एसीबी ने इस मामले में वैभव अग्रवाल से भी पूछताछ की है। वहीं एजेंसी को संदेह है कि फरारी के दौरान रामगोपाल अग्रवाल विभिन्न स्थानों पर रहे और इस अवधि में उनके संपर्कों की भी जांच की जा रही है। हालांकि इन पहलुओं पर अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।

रामगोपाल अग्रवाल वर्तमान में 17 जुलाई तक ईओडब्ल्यू-एसीबी की रिमांड पर हैं। एजेंसी उनसे कोयला, शराब, कस्टम मिलिंग और डीएमएफ से जुड़े कथित मामलों में पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि विवेचना जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।