चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर छिड़ा सियासी घमासान फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के खिलाफ मुखर असंतुष्ट नेताओं और पार्टी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के बीच शनिवार को हुई लंबी बैठक भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। अब पूरे मामले में अंतिम निर्णय का अधिकार कांग्रेस आलाकमान के पास है।
चंडीगढ़ में हुई इस अहम बैठक में असंतुष्ट खेमे का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने किया। कई घंटे तक चली चर्चा के दौरान नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व को लेकर अपनी नाराजगी खुलकर जताई। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब कांग्रेस आलाकमान ने हाल ही में राजा वारिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखने और चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त करने का निर्णय लिया है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की यह अंदरूनी कलह कांग्रेस के लिए चुनौती बनती दिखाई दे रही है।
कपूरथला से विधायक राणा गुरजीत सिंह के चंडीगढ़ स्थित आवास पर आयोजित बैठक को वारिंग विरोधी खेमे का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। बैठक में वर्तमान और पूर्व विधायकों समेत करीब 92 नेताओं ने हिस्सा लिया। नेताओं ने प्रभारी भूपेश बघेल से कहा कि उनकी आपत्ति किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि ऐसे नेतृत्व से है जो संगठन को मजबूती देने में सक्षम न हो। उनका कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों में कांग्रेस की सत्ता में वापसी मुश्किल होगी।
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, संगत सिंह गिलजियां, अरुणा चौधरी, ओपी सोनी, परगट सिंह, तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवा और भारत भूषण आशू सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक से पहले चन्नी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "इंतजार करिए और देखिए कि ऊंट किस करवट बैठता है।" इस पोस्ट को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
बैठक में असंतुष्ट नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संगठन में गुटबाजी बढ़ी है और इससे पार्टी को नुकसान हो रहा है। वहीं, राजा वारिंग ने बैठक में शामिल न होने का फैसला किया। उनका कहना था कि उनकी अनुपस्थिति में नेता बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकेंगे।
सूत्रों के अनुसार, अधिकांश नेताओं ने राजा वारिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग दोहराई। हालांकि, चरणजीत सिंह चन्नी ने स्पष्ट किया कि उनकी स्वयं प्रदेश अध्यक्ष बनने की कोई इच्छा नहीं है। उनका उद्देश्य केवल कांग्रेस को दोबारा सत्ता में लाना है।
बैठक के दौरान भूपेश बघेल ने सभी नेताओं की बातें विस्तार से सुनीं और स्पष्ट किया कि नेतृत्व परिवर्तन का निर्णय उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी सुझाव और शिकायतें कांग्रेस आलाकमान तक पहुंचाई जाएंगी। साथ ही नेताओं को सलाह दी कि पार्टी के आंतरिक मतभेद सार्वजनिक मंचों पर न रखें।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा, "सभी नेताओं से विस्तृत चर्चा हुई है। उन्होंने अपने विचार और सुझाव दिए हैं, जिन्हें आलाकमान के समक्ष रखा जाएगा। अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा।" उन्होंने यह भी कहा कि योग्य और जीतने की क्षमता रखने वाले कार्यकर्ताओं को पूरा अवसर मिलेगा।
उधर, पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि कांग्रेस को पंजाब में फिर से मजबूत बनाने के लिए संगठन में एकजुटता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पार्टी को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो जनता के मुद्दों को पूरी मजबूती से उठाए और संघर्ष करने का साहस रखता हो।
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