रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़कों के निर्माण, उन्नयन और मरम्मत के लिए खर्च किए गए करीब 87 करोड़ रुपये के फंड को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सड़क परियोजनाओं के लिए राशि आवंटित करने में राजनीतिक पक्षपात किया गया और सत्तारूढ़ दल के प्रभाव वाले जिलों को प्राथमिकता दी गई, जबकि कई विपक्षी जिलों की अनदेखी की गई।
जशपुर को मिला सबसे अधिक फंड
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर को सबसे अधिक 14.53 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली। इसके अलावा सरगुजा (11.64 करोड़), रायगढ़ (8.63 करोड़), कबीरधाम (8.32 करोड़), बलरामपुर (8.28 करोड़), कांकेर (5.48 करोड़), जीपीएम (3.28 करोड़), नारायणपुर (2.60 करोड़), दुर्ग (2 करोड़) और बिलासपुर (1.40 करोड़ रुपये) की सड़क परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई।
विपक्षी जिलों की अनदेखी का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि सक्ती, बीजापुर, कोरबा और जांजगीर-चांपा जैसे जिलों को नई सड़क परियोजनाओं के लिए कोई राशि नहीं दी गई। विपक्ष का दावा है कि सक्ती जिले को सड़क निर्माण के लिए शून्य बजट मिला, जबकि केवल मरम्मत कार्यों के लिए सीमित राशि स्वीकृत की गई।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों का समान विकास करना है, लेकिन फंड आवंटन में सत्ता पक्ष के क्षेत्रों को अधिक महत्व दिया गया। कांग्रेस ने मांग की है कि योजनाओं में धन का वितरण राजनीतिक आधार पर नहीं, बल्कि विकास की आवश्यकता और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार किया जाना चाहिए।
सरकार ने आरोपों को किया खारिज
राज्य सरकार ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि सड़क परियोजनाओं का चयन तकनीकी मानकों, प्रशासनिक स्वीकृति और संबंधित विभागों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर किया जाता है। सरकार का कहना है कि किसी भी जिले के साथ राजनीतिक आधार पर भेदभाव नहीं किया गया है और सभी स्वीकृतियां तय प्रक्रिया के तहत दी गई हैं।





