रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को विपक्षी कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए इस पर 17 जुलाई को सदन के अंतिम दिन चर्चा कराने की घोषणा की। राज्य गठन के बाद विधानसभा में यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले भी विपक्ष नौ बार सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला चुका है, लेकिन हर बार सत्ता पक्ष सदन में अपना बहुमत साबित करने में सफल रहा है।

सरकार को घेरने का विपक्ष का सबसे बड़ा संसदीय हथियार

अविश्वास प्रस्ताव केवल सरकार गिराने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि विपक्ष के लिए सरकार की कार्यशैली, नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाने का सबसे प्रभावी संसदीय माध्यम माना जाता है। चर्चा के दौरान विपक्ष सरकार की कथित विफलताओं को सदन में रखता है, जबकि सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों का पक्ष प्रस्तुत करता है। बहस पूरी होने के बाद मतदान कराया जाता है। यदि सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है तो अविश्वास प्रस्ताव स्वतः निरस्त हो जाता है।

इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगी कांग्रेस

कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सरकार को कई अहम मुद्दों पर कटघरे में खड़ा करने की तैयारी की है। विपक्ष नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, प्रदेश की कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कार्यप्रणाली जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि जनहित से जुड़े कई मामलों में सरकार अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है।

भाजपा उपलब्धियों के साथ देगी जवाब

वहीं भाजपा सरकार विपक्ष के आरोपों का जवाब अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों के आधार पर देने की तैयारी में है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में लगातार काम कर रही है और प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज हुई है।

सदन में भाजपा का स्पष्ट बहुमत

वर्तमान विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं। इसके अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का एक विधायक है। संख्या बल के लिहाज से भाजपा सरकार मजबूत स्थिति में है। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के बहुमत साबित करने में किसी कठिनाई की संभावना नहीं मानी जा रही है।

17 जुलाई को गरमाएगा सदन, सत्ता-विपक्ष होंगे आमने-सामने

17 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा के दौरान सदन में तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है। विपक्ष सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवालों की बौछार करेगा, जबकि सत्ता पक्ष अपने कामकाज और उपलब्धियों के आधार पर जवाब देगा। प्रदेश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के आमने-सामने आने से विधानसभा की कार्यवाही राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है।