रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच करीब 43 साल से चले आ रहे महानदी जल बंटवारा विवाद के समाधान की उम्मीद एक बार फिर बढ़ गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच बातचीत आगे बढ़ी है और मामला केंद्रीय जल आयोग (CWC) को सौंपा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि महानदी जल विवाद का समाधान जल्द निकल सकता है।

मुख्यमंत्री साय रविवार को दो दिवसीय ओडिशा दौरे पर रवाना होने से पहले रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी। बैठक में महानदी के जल बंटवारे और प्रबंधन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।


1983 से चला आ रहा है महानदी जल विवाद

महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद की शुरुआत 1983 में तत्कालीन मध्य प्रदेश और ओडिशा के बीच हुई थी। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद यह मामला छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच जारी रहा। बाद में महानदी पर बैराज और अन्य जल परियोजनाओं के निर्माण को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद और गहरे हो गए।

विशेष रूप से वर्ष 2016 के आसपास छत्तीसगढ़ में बैराज निर्माण को लेकर ओडिशा ने आपत्ति जताई थी। विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 12 मार्च 2018 को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था। इसके बावजूद अब तक अंतिम समाधान नहीं निकल पाया है।


दिल्ली में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की हुई थी अहम बैठक

30 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। केंद्र सरकार के अनुसार, बैठक का उद्देश्य बातचीत, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के जरिए विवाद का आपसी समाधान तलाशना था।

बैठक में दोनों राज्यों ने महानदी के पानी के वैज्ञानिक अध्ययन, जल उपलब्धता की समीक्षा और बेहतर जल प्रबंधन व्यवस्था पर चर्चा की थी। दोनों पक्षों ने संवाद और आपसी सहयोग के माध्यम से स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी।


CWC को सौंपा गया मामला

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर एयरपोर्ट पर कहा कि दिल्ली में हुई बैठक के बाद यह विषय केंद्रीय जल आयोग को सौंप दिया गया है। सीएम के अनुसार, दोनों राज्यों के अधिकारी भी लगातार इस विषय पर काम कर रहे हैं और समाधान की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर सकारात्मक स्थिति बनी है और जल्द ही इसका रास्ता निकलने की उम्मीद है।


ट्रिब्यूनल ने 28 सितंबर तक मांगी प्रगति रिपोर्ट

महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने भी दोनों राज्यों को आपसी बातचीत की प्रगति से अवगत कराने को कहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रिब्यूनल ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा को 28 सितंबर 2026 तक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इससे आने वाले दिनों में विवाद के समाधान की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।


ओडिशा के दो दिवसीय दौरे पर CM साय

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि वह दो दिनों तक ओडिशा प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान उनकी ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही वह पुरी जाकर भगवान जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करेंगे और छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे।


दोनों राज्यों के लिए अहम है महानदी

महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्यों के लिए सिंचाई, पेयजल और अन्य जल जरूरतों का महत्वपूर्ण स्रोत है। छत्तीसगढ़ जहां अपने किसानों, आदिवासी क्षेत्रों और भविष्य की विकास योजनाओं के लिए जल उपलब्धता को महत्वपूर्ण मानता है, वहीं ओडिशा की चिंताओं में हीराकुंड जलाशय, सिंचाई और गैर-मानसून अवधि में पानी की उपलब्धता शामिल है। दोनों राज्य अब बातचीत और तकनीकी अध्ययन के आधार पर साझा समाधान तलाशने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।


राहुल गांधी के कार्यक्रम पर साय का राजनीतिक बयान

ओडिशा रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री साय ने मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस को लेकर राजनीतिक टिप्पणी की और मध्य प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति पर निशाना साधा। यह बयान मुख्यमंत्री साय का राजनीतिक पक्ष है।