रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में GST फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य GST विभाग की जांच में 10 कथित फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये का कारोबार और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) दिखाए जाने का दावा किया गया है। मामले में मेसर्स अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक अमन कुमार अग्रवाल के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।


चाय वाले, मजदूर और छोटे कर्मचारियों के नाम पर फर्में

GST विभाग की जांच में सामने आया कि कई फर्में ऐसे लोगों के नाम पर दर्ज थीं, जिनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति कथित कारोबार से मेल नहीं खाती थी। इनमें चाय का ठेला लगाने वाले, इलेक्ट्रिशियन और दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोग शामिल बताए गए हैं। जांच के दौरान कुछ लोगों ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें अपने नाम पर इस तरह का कारोबार चलने की जानकारी ही नहीं थी।


विकास यदु के नाम पर 22 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

रिपोर्ट के अनुसार, विकास यदु के नाम से ‘अगस्त इंटरप्राइजेस’ नाम की फर्म बनाई गई थी। विभाग की जांच में इस फर्म से 22 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दिखाए जाने की बात सामने आई। इसके साथ ही करोड़ों रुपये के ITC का दावा भी किया गया। विकास ने जांच अधिकारियों को बताया कि वह पहले चाय का ठेला लगाता था और उसे इस कारोबार की जानकारी नहीं थी।


मृत व्यक्ति के नाम से 2025 में किरायानामा

जांच में एक और गंभीर तथ्य सामने आने का दावा किया गया है। गरियाबंद की एक फर्म के दस्तावेजों में मकान मालिक के रूप में फूल सिंह का नाम दर्ज था। विभाग के अनुसार, फूल सिंह की 2010 में मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद 2025 में उनके नाम से किरायानामा तैयार किया गया। इस फर्म के माध्यम से भी करोड़ों रुपये का कारोबार और ITC दिखाए जाने की बात सामने आई है।


कई पते पर नहीं मिला वास्तविक कारोबार

GST विभाग ने जब फर्मों के पंजीकृत पतों की जांच की तो कई स्थानों पर वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं मिली। संबंधित लोगों से पूछताछ में कुछ ने फर्म चलाने से इनकार किया, जबकि कुछ ने GST रिकॉर्ड में दर्ज बैंक खातों को भी अपना मानने से इनकार किया। विभाग को आशंका है कि फर्जी दस्तावेजों और पहचान का इस्तेमाल कर टैक्स लाभ लेने की कोशिश की गई।


अमन अग्रवाल के खिलाफ FIR

इस पूरे मामले में अमन कुमार अग्रवाल के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस और GST विभाग अब दस्तावेजों, बैंक खातों, फर्मों के पंजीकरण और कथित लेन-देन की विस्तृत जांच कर रहे हैं।


जांच में और नाम सामने आने की संभावना

फिलहाल मामला जांच के अधीन है। विभाग कथित फर्जी फर्मों के नेटवर्क, ITC के इस्तेमाल और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रहा है। जांच के आधार पर आगे और कार्रवाई की जा सकती है।