नई दिल्ली, 30 जून। सोने में निवेश करने वालों के लिए जून 2026 का महीना भारी उतार-चढ़ाव वाला साबित हुआ है। वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार जून में सोने ने अक्टूबर 2008 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज करने की ओर कदम बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) तक सोने के दामों में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
17 साल बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जून के दौरान सोने की कीमतों में करीब 12 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। यह अक्टूबर 2008 के बाद किसी एक महीने में आई सबसे बड़ी कमजोरी मानी जा रही है। वैश्विक बाजार में हाजिर (स्पॉट) सोना ताजा कारोबार के दौरान करीब 0.8 प्रतिशत फिसलकर 3,985.57 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं अगस्त डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी करीब एक प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,999.20 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया।
वैश्विक कारणों से बढ़ा दबाव
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सुधार के संकेत, निवेशकों का सुरक्षित निवेश से जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख, डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलते निवेश रुझानों ने सोने पर दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कुछ नरमी आने से भी सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग प्रभावित हुई है।
घरेलू बाजार पर भी दिखा असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई कमजोरी का असर भारतीय सर्राफा बाजार और एमसीएक्स पर भी साफ दिखाई दिया। सोने की कीमतों में लगातार गिरावट से निवेशकों के पोर्टफोलियो पर असर पड़ा है। हालांकि ज्वेलरी खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह गिरावट राहत लेकर आई है, क्योंकि कम कीमत पर सोने की खरीदारी का अवसर मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने की चाल काफी हद तक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, ब्याज दरों से जुड़े फैसलों, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक निवेशकों की रणनीति पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता दोबारा बढ़ती है तो सोने में फिर से तेजी लौट सकती है। वहीं आर्थिक हालात स्थिर रहने पर कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
खरीदारी का मौका या सतर्क रहने की जरूरत
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमतों में आई गिरावट खरीदारी का अवसर हो सकती है। हालांकि अल्पकालिक निवेश करने वालों को बाजार की दिशा स्पष्ट होने तक सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। निवेश से पहले वैश्विक बाजार की चाल और विशेषज्ञों की राय पर नजर रखना जरूरी होगा।
जून महीने में आई इस बड़ी गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि सोने का बाजार भी वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों से सीधे प्रभावित होता है। ऐसे में निवेशकों को भावनाओं के बजाय बाजार के संकेतों और दीर्घकालिक रणनीति के आधार पर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।





