गरियाबंद। आदिवासी बहुल गरियाबंद जिले में विकास कार्यों को लेकर किए जा रहे दावों के बीच जमीनी हकीकत कई सवाल खड़े कर रही है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों और बच्चों को आज भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं आंगनबाड़ी केंद्र झोपड़ी में संचालित हो रहा है तो कहीं पुल नहीं बनने के कारण स्कूली बच्चों को बरसात के दौरान कमर तक पानी पार कर स्कूल जाना पड़ रहा है।
झोपड़ी में संचालित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र
गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत सरगीगुड़ा ग्राम पंचायत के टेकनपारा में आंगनबाड़ी केंद्र एक अस्थायी झोपड़ी में संचालित किया जा रहा है। बरसात के मौसम में यहां छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है, जिससे बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
81 आंगनबाड़ी केंद्र अभी भी अस्थायी व्यवस्था में
जानकारी के अनुसार, जिले में कुल 1,525 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 209 केंद्र किराए के भवनों, 91 अन्य शासकीय भवनों तथा 81 केंद्र अस्थायी या सामुदायिक सहयोग से उपलब्ध स्थानों पर संचालित किए जा रहे हैं। दो वर्ष पहले नए भवनों की स्वीकृति मिलने के बावजूद कई स्थानों पर निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है, जिससे बच्चों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
पुल नहीं बनने से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी
दूसरी ओर साल्हेभांटा के बनवापारा से खासरपारा के बीच सड़क निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन नाले पर पुल नहीं बनने से बरसात में आवाजाही बाधित हो जाती है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को होती है, जिन्हें स्कूल पहुंचने के लिए कमर तक पानी पार करना पड़ता है। कई बार बच्चों को भीगे कपड़ों में ही स्कूल में पढ़ाई करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान यह मार्ग जोखिम भरा बन जाता है।
ग्रामीणों ने जल्द समाधान की मांग की
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से पुल निर्माण और आंगनबाड़ी भवन की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। उनका कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सबसे अधिक असर बच्चों, महिलाओं और ग्रामीणों पर पड़ रहा है।
अधिकारियों का दावा- जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के कार्यपालन अभियंता अभिषेक पाटकर ने बताया कि खासरपारा नाले पर 30 मीटर लंबे पुल के निर्माण के लिए करीब 1.58 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। फिलहाल टेंडर प्रक्रिया जारी है और प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। वहीं, आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को लेकर भी संबंधित विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है।





