रायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उद्योगों की स्थापना के लिए नए स्थल चयन मानदंड लागू किए गए हैं। अब अधिक प्रदूषण फैलाने वाले थर्मल पावर प्लांट, आयरन-स्टील, सीमेंट, डिस्टलरी और बड़े केमिकल उद्योगों को वन क्षेत्र, आबादी, शिक्षण संस्थानों और हेरिटेज साइट्स से तय दूरी पर ही स्थापित किया जा सकेगा।
लाल श्रेणी के उद्योगों के लिए 500 मीटर की दूरी जरूरी
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के नए नियमों के अनुसार, लाल श्रेणी के उद्योगों को आरक्षित वन, रहवासी क्षेत्र, स्कूल-कॉलेज और पुरातात्विक या हेरिटेज स्थलों की सीमा से कम से कम 500 मीटर दूर स्थापित करना होगा। इन उद्योगों में थर्मल पावर प्लांट, एकीकृत आयरन एवं स्टील संयंत्र, सीमेंट प्लांट, डिस्टलरी और बड़े केमिकल निर्माण उद्योग शामिल हैं।
नारंगी श्रेणी के उद्योग 200 मीटर दूर
नए मानदंडों में उद्योगों को प्रदूषण स्तर के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। नारंगी श्रेणी के उद्योगों के लिए न्यूनतम दूरी 200 मीटर तय की गई है। इसमें फूड प्रोसेसिंग यूनिट, राइस मिल, प्लास्टिक रीसाइक्लिंग, छोटे इंजीनियरिंग उद्योग और स्टोन क्रशर जैसे उद्योग शामिल हैं।
हरी श्रेणी के उद्योगों के लिए 100 मीटर का नियम
कम प्रदूषण या न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव वाले हरी श्रेणी के उद्योगों को संबंधित संवेदनशील क्षेत्रों से कम से कम 100 मीटर दूर स्थापित किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण और स्थानीय आबादी के हितों के बीच संतुलन बनाना है।
नए और लंबित आवेदनों पर भी लागू होंगे नियम
पर्यावरण संरक्षण मंडल ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्थापना या संचालन की अनुमति के लिए आने वाले सभी नए आवेदनों की जांच इन्हीं संशोधित मानदंडों के आधार पर होगी। जिन आवेदनों पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, उन पर भी नए नियम लागू किए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ के रायपुर के सिलतरा-उरला, कोरबा, रायगढ़ और भिलाई जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारी उद्योग संचालित हैं। नए मानदंड भविष्य में लगने वाली औद्योगिक इकाइयों के स्थल चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।





