रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सदन का माहौल गरमाने के आसार हैं। कांग्रेस विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी। राज्य गठन के बाद विधानसभा में यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव होगा। इससे पहले पेश किए गए सभी नौ प्रस्तावों में संबंधित सरकारें सदन का विश्वास हासिल करने में सफल रही हैं।
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की तिथि तय करेंगे। इसके बाद सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।
प्रश्नकाल भी काफी अहम रहने वाला है। विपक्ष जल जीवन मिशन, रायपुर की पेयजल व्यवस्था, औद्योगिक दुर्घटनाओं, शराब दुकानों के संचालन, शासकीय आयोजनों में खर्च और प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों सहित कई जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगा।
अविश्वास प्रस्ताव केवल सरकार गिराने की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज की व्यापक समीक्षा का अवसर भी माना जाता है। इस दौरान विपक्ष सरकार की नीतियों, फैसलों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएगा, जबकि सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां और विकास कार्यों का ब्यौरा पेश करते हुए आरोपों का जवाब देगा। बहस के बाद मतदान होगा और बहुमत सरकार के पक्ष में रहने पर प्रस्ताव स्वतः निरस्त हो जाएगा।
इस बार कांग्रेस नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बढ़ती बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक फैसलों को प्रमुख मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर चुकी है। वहीं भाजपा सरकार अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और सुशासन के दावों के साथ विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है।
विधानसभा में वर्तमान संख्या बल पर नजर डालें तो भाजपा के 54 विधायक, कांग्रेस के 35 विधायक और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का एक विधायक है। ऐसे में अंकगणित स्पष्ट रूप से सरकार के पक्ष में दिखाई देता है। यही कारण है कि अविश्वास प्रस्ताव का असर राजनीतिक संदेश और सरकार की जवाबदेही पर अधिक केंद्रित रहेगा, जबकि सरकार के गिरने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।




