कवर्धा। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के ढाई वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा होने के बीच पार्टी की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। कवर्धा के पीजी कॉलेज डोम में आयोजित भोरमदेव शक्कर कारखाना शेयर प्रमाण पत्र वितरण एवं कृषक संगोष्ठी कार्यक्रम में पंडरिया के पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव मोतीराम चंद्रवंशी के भाषण ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।


भोरमदेव शक्कर कारखाना की जमकर की सराहना

हजारों किसानों की मौजूदगी में मोतीराम चंद्रवंशी ने अपने संबोधन में भोरमदेव शक्कर कारखाना की कार्यप्रणाली की सराहना की। उन्होंने कहा कि कारखाने पर किसानों का एक रुपये का भी बकाया नहीं है और सभी गन्ना उत्पादक किसानों को समय पर भुगतान किया गया है। इसके लिए उन्होंने मंच पर मौजूद उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा की।


बिना नाम लिए जनप्रतिनिधित्व पर उठाए सवाल

अपने भाषण के दौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लिए पंडरिया क्षेत्र के जनप्रतिनिधित्व पर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि "जहां नेतृत्व सही होता है और नीति-नीयत साफ होती है, वहां किसानों का भुगतान समय पर होता है।"

इसके बाद उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हजारों किसानों की रिकवरी राशि पिछले चार महीनों से लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने स्वयं कारखाना अधिकारियों से किसानों का बकाया भुगतान जल्द करने का आग्रह किया है।


बयान को लेकर तेज हुई राजनीतिक चर्चाएं

पूर्व विधायक के इस बयान को राजनीतिक हलकों में पंडरिया विधायक भावना बोहरा पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम के बाद किसानों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात की चर्चा रही कि आखिर भाजपा के वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक मंच से अपने ही दल के जनप्रतिनिधित्व को लेकर ऐसे सवाल क्यों उठाए।


पार्टी की प्रतिक्रिया पर नजर

हालांकि, भाजपा की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम को किस रूप में लेता है और क्या इस पर कोई राजनीतिक या संगठनात्मक प्रतिक्रिया सामने आती है।