कवर्धा। अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अनावश्यक खर्च व कर्ज से बचाने के उद्देश्य से बैगा समाज ने बड़ा सामाजिक फैसला लिया है। कबीरधाम जिले के ग्राम हरमों में आयोजित बैगा समाज (सेक्टर भोरमदेव) की विशेष बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब समाज में होने वाले शादी-विवाह, छठी और अन्य सामाजिक आयोजनों में डीजे और शराब का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
बैठक में समाज के पदाधिकारियों, बुजुर्गों और ग्रामीणों की मौजूदगी में कई नए सामाजिक नियमों को मंजूरी दी गई। इनका उद्देश्य समाज की पारंपरिक संस्कृति को मजबूत करना, बढ़ते दिखावे पर रोक लगाना और गरीब परिवारों को आर्थिक बोझ से राहत दिलाना है।
दिखावे और कर्ज पर रोक लगाने की पहल
बैगा समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि हाल के वर्षों में शादी-ब्याह में डीजे, भव्य आयोजन और बढ़ते खर्च के कारण गरीब परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया था। कई परिवार सामाजिक परंपराओं को निभाने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हो रहे थे, जिससे बाद में आर्थिक संकट, जमीन बिकने और पारिवारिक विवाद जैसी समस्याएं सामने आ रही थीं।
इसी को देखते हुए समाज ने निर्णय लिया कि अब विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में डीजे नहीं बजाया जाएगा। इसके स्थान पर बैगा समाज की पारंपरिक पहचान मांदर और नगाड़े की धुनों को फिर से बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे।
सामाजिक आयोजनों में शराब पर भी पूर्ण प्रतिबंध
बैगा समाज ने नशामुक्ति की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नए नियमों के अनुसार अब शादी, छठी और अन्य सामाजिक आयोजनों में शराब परोसने या सेवन करने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
समाज का मानना है कि शराब न केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है, बल्कि सामाजिक वातावरण और पारिवारिक संबंधों पर भी नकारात्मक असर डालती है।
दशगात्र के लिए सामूहिक सहयोग की नई व्यवस्था
सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से दशगात्र (मृत्यु संस्कार) के लिए भी नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत सेक्टर के सभी गांवों में यदि किसी परिवार में मृत्यु होती है, तो हर घर से 20 रुपये नकद और एक पैली (लगभग 4 से 5 किलोग्राम) चावल सहयोग स्वरूप दिया जाएगा। इससे शोकग्रस्त परिवार को आर्थिक और सामाजिक सहयोग मिल सकेगा।
संस्कृति और परंपरा को बचाने का संकल्प
बैठक में समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य किसी पर प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि समाज के गरीब परिवारों को कर्ज के बोझ से बचाना, उनकी जमीन और आजीविका की रक्षा करना तथा युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि बैगा समाज आधुनिकता के साथ आगे बढ़ेगा, लेकिन अपनी सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपराओं और मांदर-नगाड़े की विरासत को जीवित रखेगा।
बैठक में रहे मौजूद
इस विशेष बैठक में सेक्टर भोरमदेव के अध्यक्ष शुक्लाल बैगा, संरक्षक कृष्णा बैगा, पूर्व जिलाध्यक्ष एवं जिला संरक्षक कामू बैगा, झूलूराम बैगा सहित समाज के कई पदाधिकारी, बुजुर्ग और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने सर्वसम्मति से नए सामाजिक नियमों का पालन करने का संकल्प लिया।




