रायपुर। राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित वॉलफोर्ट ओजोन परिसर में संचालित भारत ग्रुप के खिलाफ बड़ी संख्या में लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। अलग-अलग जिलों से पहुंचे पीड़ितों ने कंपनी पर अगरबत्ती बनाने की मशीन, तैयार माल की खरीद (बायबैक) और घर बैठे रोजगार का भरोसा देकर लाखों रुपये वसूलने का आरोप लगाया है। पीड़ितों ने जनदर्शन में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के साथ रायपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचकर कंपनी के संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कंपनी ने सोशल मीडिया और विज्ञापनों के जरिए लोगों को रोजगार का सपना दिखाया। दावा किया गया कि मशीन से प्रतिदिन 80 से 100 किलोग्राम तक अगरबत्ती तैयार होगी और कंपनी तय दर पर पूरा माल खरीद लेगी। साथ ही मशीन की सर्विसिंग और तकनीकी सहायता देने का भी भरोसा दिया गया। इन वादों पर विश्वास कर कई लोगों ने अपनी जमा पूंजी लगा दी, जबकि कुछ ने कर्ज लेकर मशीनें खरीदीं।
पीड़ितों के अनुसार एक मशीन की कीमत करीब 1.10 लाख से 1.20 लाख रुपये तक ली गई। लेकिन मशीनें मिलने के बाद अधिकांश ठीक से काम नहीं कर सकीं। कई मशीनें पूरी तरह बंद पड़ी हैं, जबकि जो चल रही हैं, उनका उत्पादन कंपनी के दावे से काफी कम है। लोगों का आरोप है कि 80 से 100 किलो प्रतिदिन उत्पादन का दावा करने वाली मशीनें 15 से 20 किलो अगरबत्ती भी तैयार नहीं कर पा रहीं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने मशीनों का सही तरीके से इंस्टॉलेशन नहीं कराया और तकनीकी सहायता भी समय पर उपलब्ध नहीं कराई। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, जिससे निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
पीड़ितों ने कर संबंधी अनियमितताओं के भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मशीन बेचते समय वैध जीएसटी बिल नहीं दिया गया और अधिकांश ग्राहकों को केवल कच्चा चालान थमा दिया गया। उन्होंने पूरे मामले में संभावित टैक्स चोरी की भी जांच कराने की मांग की है।
कच्चे माल की आपूर्ति को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि दस्तावेजों में जितना कच्चा माल भेजने की बात कही गई, वास्तविक आपूर्ति उससे कम की गई। कई बोरियों में दो से तीन किलोग्राम तक वजन कम पाया गया। पीड़ितों का कहना है कि उनके पास डिजिटल कांटे से किए गए वजन के फोटो सहित अन्य साक्ष्य मौजूद हैं।
सबसे बड़ा आरोप कंपनी की बायबैक व्यवस्था को लेकर लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि तैयार अगरबत्ती खरीदने का वादा किया गया था, लेकिन उत्पादन के बाद कंपनी ने अलग-अलग कारण बताकर माल लेने से इनकार कर दिया। इससे बड़ी मात्रा में तैयार माल घरों और गोदामों में पड़ा रह गया। कई मामलों में गुणवत्ता का हवाला देकर भुगतान रोकने या मनमानी कटौती करने के भी आरोप लगाए गए हैं।
पीड़ितों का यह भी कहना है कि जब उन्होंने मशीनों की खराबी, कम वजन वाले कच्चे माल और भुगतान में देरी को लेकर सवाल उठाए तो कंपनी के कुछ जिम्मेदार लोगों ने अनुबंध समाप्त करने और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। कुछ लोगों ने दबाव बनाकर माफीनामा लिखवाने की कोशिश का भी आरोप लगाया है।
जनदर्शन में दिए गए ज्ञापन में पीड़ितों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कंपनी के वित्तीय लेन-देन, मशीनों की गुणवत्ता, जीएसटी बिल, नापतौल और बायबैक व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषपूर्ण मशीनें वापस लेने, जमा राशि ब्याज सहित लौटाने, आर्थिक नुकसान की भरपाई करने और कंपनी के संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात तथा धमकी जैसी धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की गई है।
फिलहाल मामले में पीड़ितों ने प्रशासन और पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई है। दूसरी ओर, इस मामले में कंपनी का पक्ष और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।





