रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद पिछले ढाई दशकों में कई चर्चित आपराधिक, भ्रष्टाचार और राजनीतिक मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। इनमें झीरम घाटी नक्सली हमला, महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप, अंतागढ़ टेपकांड, नान घोटाला और कोयला लेवी जैसे कई हाई-प्रोफाइल मामले शामिल हैं। हालांकि, इनमें से अधिकांश मामलों में अब तक अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आ सके हैं। कहीं आरोप पत्र लंबित हैं तो कहीं सुनवाई जारी है, जबकि कुछ मामलों में जांच अभी भी पूरी नहीं हो सकी है।

हाल ही में कोरिया जिले के तिहरे हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की मांग के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि राज्य के चर्चित मामलों में केंद्रीय एजेंसी की जांच कितनी प्रभावी रही और अब तक उसके क्या परिणाम सामने आए हैं।

राज्य में अब तक सीबीआई को सौंपे गए मामलों में कई ऐसे हैं, जिनका राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक असर रहा। कुछ मामलों में प्रभावशाली नेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों से पूछताछ हुई, कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन अधिकांश प्रकरणों में अदालत से अंतिम फैसला अभी तक नहीं आया है।

सीबीआई को सौंपे गए प्रमुख मामलों में झीरम घाटी हमला, महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामला, नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाला, अंतागढ़ टेपकांड, कोयला लेवी घोटाला, शराब घोटाला, पीएससी भर्ती अनियमितता समेत कई अन्य संवेदनशील प्रकरण शामिल हैं। इन मामलों में अलग-अलग स्तर पर जांच, पूछताछ, चार्जशीट और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी से लोगों की अपेक्षा निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की होती है, लेकिन लंबे समय तक मामलों के लंबित रहने से पीड़ित पक्ष और आम जनता में असंतोष भी देखने को मिलता है। वहीं, जांच एजेंसियों का तर्क है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में साक्ष्य जुटाने, तकनीकी जांच और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण जांच में अधिक समय लगता है।

इसी बीच कोरिया तिहरे हत्याकांड के बाद एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग और एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए मामलों में जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और लंबे समय से लंबित प्रकरणों में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष कब तक सामने आते हैं।