जगदलपुर। बस्तर दशहरा के दौरान आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मुरिया दरबार के नाम को लेकर विवाद गहरा गया है। दंतेश्वरी मंदिर समिति के नाम से वायरल हुई एक कथित कार्यक्रम विवरणिका में 'मुरिया दरबार' की जगह 'आम दरबार' लिखे जाने पर मुरिया समाज और सर्व आदिवासी समाज ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
बुधवार को दोनों संगठनों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर सीबी बघेल को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि कार्यक्रम विवरणिका में 'आम दरबार' शब्द को हटाकर पारंपरिक नाम 'मुरिया दरबार' ही प्रकाशित किया जाए।
1875 से चली आ रही है परंपरा
ज्ञापन में बताया गया है कि बस्तर दशहरा के दौरान बाहर रैनी के दूसरे दिन सिरहासार भवन में मुरिया दरबार आयोजित करने की परंपरा वर्ष 1875 से चली आ रही है। इस दरबार में राजा, मांझी, चालकी, पुजारी और आमजन भाग लेते हैं। वर्तमान समय में जनप्रतिनिधि भी इसमें शामिल होते हैं। दरबार में क्षेत्र की समस्याओं, मांगों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि मुरिया दरबार बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है, इसलिए इसका नाम बदलना लोगों की भावनाओं को आहत कर सकता है।
प्रशासन की ओर से नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बस्तर दशहरा आयोजन समिति या जिला प्रशासन की ओर से अभी तक अधिकृत कार्यक्रम विवरणिका जारी नहीं की गई है। संभावना है कि अगले एक-दो दिनों में आधिकारिक कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
वहीं, दंतेश्वरी मंदिर समिति के नाम से वायरल हो रही कार्यक्रम सूची को लेकर समिति के कुछ सदस्यों से संपर्क किया गया, लेकिन किसी ने भी इस विषय पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।





