रायपुर। छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर बहस तेज हो गई है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर राहत देने वाला मॉडल लागू किया जाए। इस संबंध में सरकार से आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक पहल करने की अपील की जा रही है।
सेवा सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों से स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में बाद में लागू हुए नियमों का प्रभाव पूर्व से कार्यरत शिक्षकों पर पड़ने से उनकी नौकरी और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। उनका मानना है कि पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अलग नीति बनाई जानी चाहिए।
MP और UP मॉडल अपनाने की मांग
संगठनों का कहना है कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर सरकारों ने कानूनी विकल्पों और राहत के उपायों पर पहल की है। इसी तरह छत्तीसगढ़ सरकार भी केंद्र और न्यायालय के समक्ष आवश्यक कदम उठाकर शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करे, ताकि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
सरकार से जल्द निर्णय की अपेक्षा
शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करना नहीं, बल्कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों के अधिकारों और भविष्य की रक्षा करना है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर जल्द निर्णय लेने और सभी पक्षों से संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उचित निर्णय नहीं लिया गया तो आगे आंदोलन की रणनीति भी बनाई जा सकती है।





