छत्तीसगढ़ के रामगढ़ कोयला ब्लॉक को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। खनन परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, पुनर्वास तथा पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। मामले ने तूल पकड़ने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों की सक्रियता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, परियोजना प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि और आजीविका पर खनन गतिविधियों का सीधा असर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि कई परिवारों को अब तक उचित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिल पाया है। साथ ही रोजगार देने के किए गए आश्वासनों पर भी पूरी तरह अमल नहीं हुआ है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि खनन कार्य शुरू होने के बाद क्षेत्र में धूल, प्रदूषण और आवाजाही बढ़ने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। खेती, जल स्रोतों और पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर भी लोगों ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है।
वहीं, संबंधित अधिकारियों का कहना है कि परियोजना से जुड़े सभी कार्य निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत किए जा रहे हैं। जिन परिवारों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, उनकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी पात्र हितग्राही को मुआवजा या पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है तो उसका परीक्षण कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने संबंधित विभागों से परियोजना की प्रगति, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और पुनर्वास की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। उनका मानना है कि जब तक सभी पात्र परिवारों को नियमानुसार मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक असंतोष बना रहेगा।
फिलहाल रामगढ़ कोयला ब्लॉक से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यकतानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि विकास कार्यों और स्थानीय लोगों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।





