नई दिल्ली/रायपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन राज्यों में चुनावी माहौल और नतीजों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया। उन्होंने इसे अपने कथित ‘वोट चोरी’ के दावे से जोड़कर देखा।


मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनावों का किया जिक्र

राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें चुनावी प्रक्रिया को लेकर संदेह किसी एक घटना से नहीं हुआ, बल्कि कई चुनावों के आंकड़ों और परिणामों के तकनीकी विश्लेषण के बाद उनका संदेह मजबूत हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास चुनावी आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली तकनीकी विशेषज्ञों की टीम है।

उनके मुताबिक, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के नतीजों को लेकर भी विशेषज्ञों ने कई सवाल उठाए थे। राहुल गांधी ने दावा किया कि इन राज्यों में जमीन पर जो राजनीतिक माहौल दिख रहा था, चुनाव परिणाम उससे अलग रहे। हालांकि ये आरोप राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं।


कई राज्यों के चुनावों पर भी उठाए सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने केवल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का ही नहीं, बल्कि हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात समेत अन्य राज्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली सरकारों के खिलाफ आम तौर पर सत्ता विरोधी माहौल दिखाई देता है, लेकिन भाजपा के मामले में कई जगह ऐसा क्यों नजर नहीं आता।

उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी सवाल खड़े किए और मतदाता सूची तथा चुनाव परिणामों के आंकड़ों पर अधिक पारदर्शिता की मांग की।


चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें कार्यपालिका का प्रभाव न हो और संस्था की स्वतंत्रता पूरी तरह सुनिश्चित हो।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले करीब तीन वर्षों से वह चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठा रहे हैं और चुनाव आयोग से मतदाता सूची तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के जवाब सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।


कांग्रेस के आरोप, चुनाव आयोग और भाजपा की अलग स्थिति

राहुल गांधी द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोप राजनीतिक दावे हैं। संबंधित चुनावों के घोषित नतीजे भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक प्रक्रिया के तहत जारी किए गए थे। किसी चुनाव परिणाम को अवैध घोषित करने या ‘वोट चोरी’ साबित होने का कोई न्यायिक निष्कर्ष इस रिपोर्ट में सामने नहीं रखा गया है।

ऐसे में राहुल गांधी के बयानों को कांग्रेस के राजनीतिक आरोप और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य के रूप में।


चुनावी पारदर्शिता पर बहस तेज

राहुल गांधी के इन बयानों के बाद मतदाता सूची, चुनावी आंकड़ों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस जहां अधिक पारदर्शिता और चुनावी आंकड़ों की विस्तृत जांच की मांग कर रही है, वहीं इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं रही हैं।