भिलाई। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाली अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंडवानी गायिका एवं पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई अब इस दुनिया में नहीं रहीं। रविवार तड़के करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई।


रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में प्रशंसक, लोक कलाकार, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और ग्रामीण शामिल हुए। नम आंखों से सभी ने अपनी प्रिय लोकगायिका को अंतिम विदाई दी।


राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

जिला प्रशासन ने अंतिम संस्कार के लिए विशेष व्यवस्थाएं की थीं। गनियारी में जैसे ही डॉ. तीजन बाई की अंतिम यात्रा निकली, पूरा गांव शोक में डूब गया। राजकीय सम्मान के तहत उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।


छत्तीसगढ़ की संस्कृति को दिलाई वैश्विक पहचान

डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय प्रस्तुति शैली और दमदार आवाज से पंडवानी लोकगायन को देश-विदेश में नई पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत कर लाखों लोगों का दिल जीता और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच तक पहुंचाया।

उनकी कला और योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया था।


कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति

डॉ. तीजन बाई के निधन को लोककला जगत की अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके जाने से पंडवानी गायन की एक युगांतकारी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई, लेकिन उनकी कला, संघर्ष और विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।