रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित आबकारी और कोल लेवी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को अदालत से राहत नहीं मिली है। रायपुर की विशेष PMLA कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अग्रवाल को जमानत देने से इनकार कर दिया।

ED ने जमानत का किया विरोध

रामगोपाल अग्रवाल की ओर से विशेष अदालत में जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ताओं ने जमानत के पक्ष में अपनी दलीलें रखीं। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमानत आवेदन का विरोध किया।

अदालत ने मामले की प्रकृति, जांच में सामने आई सामग्री और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका सहित विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद जमानत आवेदन खारिज कर दिया। इससे पहले अगस्त 2026 में भी उनकी जमानत याचिका खारिज होने की जानकारी सामने आई थी।

आबकारी और कोल लेवी मामले की जांच जारी

ED कथित आबकारी घोटाले और कोल लेवी प्रकरण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अपराध से अर्जित रकम का लेन-देन किस तरह किया गया और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष आरोप लगाया है कि कथित आबकारी घोटाले से जुड़ी नकद राशि के लेन-देन में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

रायपुर सेंट्रल जेल में हैं रामगोपाल अग्रवाल

रामगोपाल अग्रवाल फिलहाल रायपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं और संबंधित मामलों में न्यायिक रिमांड पर हैं। विशेष PMLA कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद फिलहाल उन्हें जेल में ही रहना होगा। मामले में ED की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।