रायपुर। छत्तीसगढ़ के दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का लाभ समय पर पहुंचाने के लिए नारायणपुर जिला प्रशासन ने सराहनीय पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशों के अनुरूप बारिश और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने ट्रैक्टरों के माध्यम से अंदरूनी गांवों तक तीन माह का अग्रिम राशन पहुंचाया।
कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशन में जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित मुरुमवाड़ा, गुडेकोर, दिवालूर, धोबे, बोटेर और हरबेल गांवों के राशन कार्डधारकों को जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने का खाद्यान्न एक साथ वितरित किया गया।
151 परिवारों को मिला तीन महीने का राशन
खाद्य विभाग के अनुसार, इन छह दुर्गम गांवों के 151 राशन कार्डधारी परिवारों को निर्धारित मात्रा में तीन माह का राशन उपलब्ध कराया गया। इनमें मुरुमवाड़ा के 98 परिवार, दिवालूर के 32, गुडेकोर के 13, धोबे के 3, हरबेल के 3 और बोटेर के 2 परिवार शामिल हैं।
बारिश और कठिन रास्तों के बीच पहुंची राहत
घने जंगल, कच्चे रास्ते और नदी-नालों से घिरे इन गांवों में बारिश के दौरान आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है। पहले ग्रामीणों को राशन लेने के लिए कई किलोमीटर पैदल और जोखिम भरा सफर तय करना पड़ता था। इस बार जिला प्रशासन ने ट्रैक्टर के जरिए सीधे गांवों तक राशन पहुंचाकर इस समस्या का समाधान किया।
बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को बड़ी सुविधा
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से राशन वितरण किया गया। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हुई है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग हितग्राहियों को घर के नजदीक राशन मिलने से बड़ी राहत मिली।
अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य
जिला प्रशासन का कहना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बसे प्रत्येक पात्र परिवार तक समय पर पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। प्रशासन लगातार दुर्गम क्षेत्रों के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था विकसित कर रहा है, ताकि बारिश और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां भी लोगों के अधिकारों में बाधा न बनें।





