बिलासपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रकरण में सामने आए प्रारंभिक साक्ष्य आरोपी के खिलाफ गंभीर हैं। खासतौर पर DNA जांच रिपोर्ट में आरोपी को पीड़िता से जन्मे बच्चे का जैविक पिता पाए जाने को कोर्ट ने महत्वपूर्ण तथ्य माना।
मामले का आरोपी छोटू यादव है। उसके खिलाफ कोरबा जिले के अजाक थाने में पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
लापता हुई थी नाबालिग, लौटने के बाद सामने आया मामला
अभियोजन के मुताबिक, मई 2025 में नाबालिग अचानक घर से गायब हो गई थी। परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। कुछ दिनों बाद जब वह वापस घर लौटी तो मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची।
जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि किशोरी गर्भवती है। इसके बाद पुलिस ने मामले में आरोपी युवक की भूमिका की जांच शुरू की और संबंधित साक्ष्य जुटाए।
शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप
पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया कि आरोपी ने उससे प्रेम संबंध बनाए और शादी का भरोसा दिया। इसी दौरान उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए गए।
बाद में किशोरी ने एक बच्चे को जन्म दिया। हालांकि जन्म के कुछ समय बाद ही नवजात की मौत हो गई।
DNA टेस्ट में सामने आई जैविक पिता की पहचान
जांच के दौरान आरोपी और नवजात का DNA परीक्षण कराया गया। रिपोर्ट में आरोपी को बच्चे का जैविक पिता बताया गया। हाईकोर्ट ने इस वैज्ञानिक साक्ष्य को मामले की सुनवाई में बेहद अहम माना।
अदालत ने यह भी देखा कि पीड़िता के बयान और मेडिकल दस्तावेजों में प्रथम दृष्टया तालमेल है। इसी आधार पर आरोपी को फिलहाल जमानत का लाभ देने से इनकार कर दिया गया।
आरोपी ने प्रेम संबंध का दिया था तर्क
आरोपी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि दोनों के बीच आपसी प्रेम संबंध थे और पीड़िता अपनी इच्छा से उसके साथ गई थी। साथ ही उम्र को लेकर भी सवाल उठाए गए।
हालांकि रिकॉर्ड में उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। अदालत ने पूरे मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।





