ग्वालियर में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम और राहत देने वाला फैसला सुनाया है, जिसमें बैंक खातों को फ्रीज करने को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई की सीमाएं तय की गई हैं।

🏛️ मामला क्या था?

यह मामला शाबू बंजारा की याचिका से जुड़ा है। उनके बैंक खाते को साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों के आधार पर पुलिस द्वारा फ्रीज कर दिया गया था। ये शिकायतें कर्नाटक और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई थीं।

💰 विवादित राशि कितनी थी?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पूरे मामले में विवादित रकम सिर्फ 1,527.80 रुपये थी। यानी मामला बहुत छोटी राशि का था, लेकिन इसके बावजूद पूरा बैंक खाता रोक दिया गया।

⚖️ हाईकोर्ट की टिप्पणी

न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि—

  • जांच एजेंसियों को किसी भी संदिग्ध या विवादित राशि की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करने का अधिकार है
  • लेकिन बहुत छोटी रकम के विवाद में पूरे बैंक खाते को फ्रीज करना उचित नहीं है
  • ऐसी कार्रवाई से आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी होती है

📌 कोर्ट का आदेश

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए संबंधित बैंक को निर्देश दिया कि:

  • शाबू बंजारा का बैंक खाता तुरंत डी-फ्रीज (खोल) किया जाए

🧾 फैसले का महत्व

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि:

  • साइबर मामलों में अक्सर पूरे खाते को ब्लॉक कर दिया जाता है
  • इससे निर्दोष खाताधारकों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई अनुपातिक (proportionate) होनी चाहिए

👉 इस फैसले से भविष्य में पुलिस और जांच एजेंसियों को यह ध्यान रखना होगा कि केवल उतनी ही कार्रवाई की जाए, जितनी जरूरी हो, न कि पूरे बैंक खाते को बंद कर दिया जाए।