हिरासत में मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: छत्तीसगढ़ DGP को फटकार, CBI जांच के आदेश; परिवार को मिलेंगे 25 लाख रुपये
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हिरासत में मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: छत्तीसगढ़ DGP को फटकार, CBI जांच के आदेश; परिवार को मिलेंगे 25 लाख रुपये
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हिरासत से जुड़े एक व्यक्ति की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने मामले में सामने आए तथ्यों और पुलिस के पक्ष पर नाराजगी जाहिर की। रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई है।
18 जनवरी 2024 को हुई थी गिरफ्तारी
मामला बिलासपुर जिले के सीपत थाना क्षेत्र का है। रिपोर्ट के अनुसार 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे को पुलिस ने 18 जनवरी 2024 को छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत गिरफ्तार किया था।
पुलिस का दावा था कि उसके पास से करीब 6 लीटर कच्ची महुआ शराब बरामद हुई थी। गिरफ्तारी और रिमांड की प्रक्रिया के बाद उसे केंद्रीय जेल बिलासपुर भेज दिया गया था।
जेल में बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में मौत
रिपोर्ट के मुताबिक 21 जनवरी को जेल में श्रवण की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उसे इलाज के लिए सिम्स, बिलासपुर ले जाया गया। उपचार के दौरान 22 जनवरी 2024 की सुबह करीब 6 बजे उसकी मौत हो गई।
मौत के बाद मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया। रिपोर्ट में शरीर पर चोटों का उल्लेख सामने आने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया। पुलिस की ओर से बताए गए घटनाक्रम और मेडिकल निष्कर्षों को लेकर सवाल खड़े हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस के दावों पर उठाए सवाल
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर शीर्ष अदालत ने पुलिस और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी मानते हुए CBI जांच का आदेश दिया।
इसके साथ ही पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट की सख्ती के बाद अब CBI जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हिरासत से जेल और अस्पताल तक के घटनाक्रम में वास्तव में क्या हुआ और मौत के लिए किसी अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही बनती है या नहीं।
यह फैसला हिरासत में रखे गए लोगों की सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।