बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सामने आए सर्पदंश (सांप के काटने) मुआवजा घोटाले ने प्रशासन और पुलिस को हिला दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि कई वर्षों से सामान्य मौतों को सर्पदंश से हुई मौत बताकर शासन से मुआवजा हासिल किया जा रहा था। अब तक की जांच में 431 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है और करीब 17.24 करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
पुलिस जांच के अनुसार, मृतकों की वास्तविक मौत का कारण बदलकर उसे सर्पदंश दिखाया गया। इसके लिए कथित तौर पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, राजस्व दस्तावेज और अन्य सरकारी रिकॉर्ड तैयार किए गए। इन दस्तावेजों के आधार पर मृतकों के परिजनों के नाम पर शासन से मिलने वाली 4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता का दावा किया गया।
कई विभागों के लोगों की भूमिका
जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले में डॉक्टर, राजस्व विभाग के कर्मचारी, वकील, बैंक कर्मचारी और अन्य लोगों की मिलीभगत की आशंका है। पुलिस का कहना है कि यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा था, जिसने सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर करोड़ों रुपये की राशि निकाल ली।
कई आरोपी गिरफ्तार
मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार लोगों में डॉक्टर, राजस्व विभाग के कर्मचारी, वकील और अन्य सहयोगी शामिल हैं। पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है और जांच के दायरे में आने वाले अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
16 से अधिक एफआईआर दर्ज
घोटाले के सामने आने के बाद पुलिस ने अलग-अलग मामलों में 16 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी मामले सामने आ सकते हैं तथा गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है।
जांच जारी, और खुलासे की संभावना
बिलासपुर पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह घोटाला कई वर्षों से संचालित हो रहा था और जांच पूरी होने के बाद इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिन मामलों में फर्जी तरीके से सरकारी मुआवजा लिया गया है, उनकी भी विस्तृत जांच की जा रही है।





