ग्वालियर। मध्य प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस ने व्यापक रणनीति तैयार की है। राज्यभर में मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने और नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत बड़े तस्करों से लेकर मोहल्लों और गलियों में नशा बेचने वाले छोटे एजेंटों तक की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस विभाग पहली बार एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत पिछले 10 वर्षों में पकड़े गए तस्करों का विस्तृत डाटाबेस तैयार कर रहा है। इस डाटाबेस के माध्यम से पुराने अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने और दोबारा अपराध करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही प्रदेश में 15 जुलाई से 31 जुलाई तक "नशे से दूरी है जरूरी" अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य केवल नशे के कारोबार पर रोक लगाना ही नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है।

अभियान के दौरान पुलिस विभाग नशा मुक्ति केंद्रों की भी सहायता लेगा। विशेषज्ञों और परामर्शदाताओं की मदद से नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि केवल कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि नशे के शिकार लोगों का पुनर्वास भी उतना ही आवश्यक है।

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना स्वयं इस पूरे अभियान की निगरानी करेंगे। ग्वालियर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। स्थानीय पुलिस अधिकारियों को अभियान को प्रभावी बनाने और नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा, हर महीने नशे से जुड़े मामलों और अवैध कारोबारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की समीक्षा भी की जाएगी। पुलिस का लक्ष्य नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और युवाओं को इस सामाजिक बुराई से बचाना है। अधिकारियों का कहना है कि जनजागरूकता, सख्त कानून और पुनर्वास कार्यक्रमों के समन्वय से ही नशा मुक्त समाज का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।