बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े आदेश पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। वरिष्ठ अधिकारी की अनदेखी कर जूनियर अधिकारियों को एसपी और कमांडेंट का प्रभार दिए जाने का आरोप लगाते हुए एडिशनल एसपी ऋचा मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने राज्य शासन समेत अन्य पक्षकारों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
20 जुलाई को जारी हुआ था ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश
राज्य शासन ने 20 जुलाई 2026 को पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का आदेश जारी किया था। आदेश में कुछ अधिकारियों को एसपी और कमांडेंट का प्रभार सौंपा गया था। इसी आदेश को लेकर एडिशनल एसपी ऋचा मिश्रा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
याचिका में ऋचा मिश्रा ने दावा किया है कि एडिशनल एसपी की ग्रेडेशन लिस्ट में उनका नाम 35वें स्थान पर है। इसके बावजूद उनसे जूनियर अधिकारियों को एसपी और कमांडेंट जैसे उच्च पदों का प्रभार दे दिया गया, जबकि उन्हें डिप्टी कमांडेंट के पद पर पदस्थ किया गया है।
वरिष्ठता की अनदेखी का लगाया आरोप
याचिकाकर्ता का कहना है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश जारी करते समय वरिष्ठता सूची का पालन नहीं किया गया। उनसे वरिष्ठता में नीचे आने वाले अधिकारियों को उच्च पदों की जिम्मेदारी दी गई, जबकि वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें इसका अवसर नहीं मिला।
याचिका में राज्य सरकार के 14 जुलाई 2014 के सर्कुलर का भी हवाला दिया गया है। इसमें कथित तौर पर प्रावधान है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी को नजरअंदाज कर उससे जूनियर अधिकारी को उच्च पद का प्रभार नहीं दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने आदेश के क्रियान्वयन पर लगाई रोक
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने 20 जुलाई 2026 को जारी ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार समेत संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।





