बिलासपुर, 25 जून 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि शिक्षकीय संवर्ग के अधिकारियों को प्रशासनिक पदों का अतिरिक्त प्रभार देना नियमों के अनुरूप नहीं है। अदालत ने जनजगीर-चांपा जिले के बलौदा विकासखंड में एक व्याख्याता को प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) का अतिरिक्त प्रभार सौंपने संबंधी राज्य शासन के आदेश को निरस्त कर दिया है।
यह फैसला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ में न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु द्वारा सुनाया गया। अदालत ने यह आदेश सहायक खंड शिक्षा अधिकारी (एबीईओ) रवि कुमार गौतम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया।
क्या था विवाद?
याचिकाकर्ता रवि कुमार गौतम ने अदालत को बताया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2015 में सहायक खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर हुई थी। विभागीय व्यवस्था के तहत जुलाई 2025 में उन्हें प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया था और वे नियमित रूप से उक्त जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे थे।
याचिका के अनुसार, 10 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर बलौदा विकासखंड में पदस्थ व्याख्याता अनिल कुमार शर्मा को खंड शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। इस आदेश के बाद रवि कुमार गौतम को प्रभारी बीईओ के दायित्व से मुक्त कर दिया गया।
रवि कुमार गौतम ने इस आदेश को नियमों के विरुद्ध बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका तर्क था कि खंड शिक्षा अधिकारी एक प्रशासनिक पद है, जबकि व्याख्याता शिक्षकीय संवर्ग का पद है। ऐसे में सेवा नियमों और विभागीय प्रावधानों के अनुसार शिक्षकीय संवर्ग के अधिकारी को प्रशासनिक पद का प्रभार नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित सेवा नियमों, विभागीय प्रावधानों और दोनों पक्षों की दलीलों का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि प्रशासनिक पदों पर पदस्थापना और अतिरिक्त प्रभार देने के संबंध में निर्धारित नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षकीय संवर्ग और प्रशासनिक संवर्ग की भूमिकाएं अलग-अलग हैं तथा प्रशासनिक पदों का प्रभार उन्हीं अधिकारियों को दिया जाना चाहिए जो संबंधित प्रशासनिक संवर्ग से जुड़े हों। इसलिए व्याख्याता को खंड शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार देने का आदेश नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
शासन का आदेश हुआ निरस्त
हाईकोर्ट ने राज्य शासन द्वारा जारी उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत व्याख्याता अनिल कुमार शर्मा को प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। अदालत के इस फैसले को शिक्षा विभाग में प्रशासनिक और शिक्षकीय संवर्ग से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विभागीय व्यवस्थाओं पर पड़ेगा प्रभाव
कानूनी जानकारों का मानना है कि इस निर्णय का प्रभाव भविष्य में शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पदों पर प्रभार देने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अदालत के आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि विभागीय नियुक्तियों और अतिरिक्त प्रभार के मामलों में निर्धारित नियमों और सेवा संरचना का पालन करना अनिवार्य होगा।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित विभाग को नियमों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी होगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी इस फैसले को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।





