भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कृषि प्रधान राज्य होने के बावजूद किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने को देखते हुए सरकार ने कृषि के साथ-साथ उद्यानिकी और पशुपालन को भी प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है।

सरकार का मानना है कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, बागवानी और पशुपालन से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

इसके साथ ही जिन फसलों का बाजार मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम रहता है, उन्हें भावांतर भुगतान योजना के तहत शामिल कर किसानों को उचित मूल्य दिलाने की व्यवस्था की गई है। राज्य में पहली बार सरसों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। वहीं उड़द उत्पादक किसानों को प्रति क्विंटल 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का फैसला किया गया है।

किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने भूमि अधिग्रहण मुआवजे में भी बड़ा बदलाव किया है। अब भूमि अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को पहले की तुलना में चार गुना तक अधिक मुआवजा दिया जाएगा।

सरकार का दावा है कि इन कदमों से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं का विकास होगा।