रायपुर। राजधानी रायपुर में आयोजित संस्कृति और हस्तशिल्प मेले ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कलाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस आयोजन में राज्य की लोककला, हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, आभूषण और ग्रामीण जीवनशैली की अनूठी झलक देखने को मिली।
मेले में बस्तर, सरगुजा और अन्य क्षेत्रों के कारीगरों ने अपने हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया, जिनमें बांस शिल्प, मिट्टी कला, धातु शिल्प (धोकरा आर्ट), और काष्ठ कला प्रमुख रहे। इसके साथ ही पारंपरिक लोकनृत्य और लोकगीतों ने दर्शकों को आकर्षित किया और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को उजागर किया।
आयोजन का उद्देश्य राज्य की परंपरागत कला और हस्तशिल्प को बढ़ावा देना, स्थानीय कारीगरों को मंच प्रदान करना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना बताया गया। मेले में ग्रामीण संस्कृति की सादगी और लोकजीवन की विविधता को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कुल मिलाकर, यह मेला छत्तीसगढ़ की “लोक-संस्कृति और हस्तशिल्प की धरोहर” को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।





