इंदौर। तकनीक और इंटरनेट के इस दौर में मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। जहां इन साधनों ने कामकाज, शिक्षा और मनोरंजन को आसान बनाया है, वहीं दूसरी ओर इनका अत्यधिक उपयोग आंखों की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत लोगों को कई तरह की नेत्र संबंधी समस्याओं की ओर धकेल रही है।
इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज स्थित स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई सहित शहर के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में आंखों से जुड़ी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार पहले जहां इस तरह की समस्याएं मुख्य रूप से वयस्कों में देखने को मिलती थीं, वहीं अब बच्चे और किशोर भी बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे हैं।
बढ़ रही हैं ये समस्याएं
नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने से आंखों में जलन, सूखापन, लालिमा, धुंधला दिखाई देना, सिरदर्द, आंखों में भारीपन और थकान जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। कई लोगों को लगातार स्क्रीन देखने के कारण ध्यान केंद्रित करने में भी परेशानी होने लगी है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि स्क्रीन पर काम करते समय लोग सामान्य से कम पलकें झपकाते हैं। इससे आंखों की नमी कम हो जाती है और ड्राई आई सिंड्रोम जैसी समस्या पैदा हो सकती है। इसके अलावा स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी आंखों पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
बच्चों पर अधिक असर
ऑनलाइन पढ़ाई, वीडियो गेम, सोशल मीडिया और डिजिटल मनोरंजन के कारण बच्चों का स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र में अत्यधिक स्क्रीन उपयोग से आंखों की कमजोरी, चश्मे का नंबर बढ़ना और दृष्टि संबंधी अन्य समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
नेत्र विशेषज्ञों ने लोगों को स्क्रीन का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है—
- हर 20 मिनट बाद कम से कम 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें (20-20-20 नियम)।
- स्क्रीन और आंखों के बीच उचित दूरी बनाए रखें।
- पर्याप्त रोशनी में ही मोबाइल या कंप्यूटर का उपयोग करें।
- लगातार कई घंटों तक स्क्रीन देखने से बचें और बीच-बीच में ब्रेक लें।
- आंखों में जलन या धुंधलापन महसूस होने पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।
- बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित रखें और उन्हें आउटडोर गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।
स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की जरूरत
चिकित्सकों का मानना है कि डिजिटल उपकरण आधुनिक जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन इनके उपयोग में संतुलन बेहद जरूरी है। समय रहते सावधानी बरतकर आंखों की गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें और नियमित रूप से नेत्र परीक्षण कराते रहें।





