उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में आधार कार्ड पर पर्सनल लोन दिलाने और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) कराने के नाम पर बड़े वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। इस कथित ठगी का शिकार शहर के 50 से अधिक लोग हुए हैं और अब तक सामने आई शिकायतों के अनुसार ठगी की रकम 1 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। मामले के खुलासे के बाद पीड़ितों में आक्रोश है और उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मिलकर कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, पीड़ितों ने पुलिस को दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल लेन-देन से जुड़े साक्ष्य सौंपे हैं। उनका आरोप है कि एक ऑनलाइन सर्विस सेंटर के माध्यम से उन्हें पर्सनल लोन और निवेश योजनाओं का लालच देकर धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया।
पर्सनल लोन के नाम पर रची गई साजिश
पीड़ितों के मुताबिक, वे आधार कार्ड के आधार पर पर्सनल लोन की राशि प्राप्त करने के लिए एक ऑनलाइन सर्विस सेंटर पहुंचे थे। वहां संचालक ने उन्हें भरोसे में लेकर बताया कि लोन की राशि उनके खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। इस दौरान तकनीकी समस्या और सर्वर डाउन होने का बहाना बनाकर उनसे मोबाइल फोन ले लिया गया।
इसके बाद मोबाइल के जरिए ट्रांजेक्शन किए गए, लेकिन जब पीड़ितों के खातों में रकम नहीं पहुंची तो उन्हें बताया गया कि पैसा पोर्टल में अटक गया है या फिर आरबीआई का सर्वर डाउन होने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इसी बहाने उन्हें वापस भेज दिया गया।
एफडी कराने के नाम पर भी ठगी
मामले में एक युवक ने आरोप लगाया कि उससे फिक्स्ड डिपॉजिट कराने के नाम पर करीब 2.5 लाख रुपये यूपीआई के माध्यम से जमा कराए गए। वहीं उसकी मां से भी अलग-अलग किस्तों में लगभग 50 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए गए। बाद में जब एफडी की कोई रसीद या वैध दस्तावेज नहीं मिला, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
पीड़ितों ने यूपीआई ट्रांजेक्शन और बैंक लेन-देन से संबंधित सभी प्रमाण पुलिस को उपलब्ध करा दिए हैं, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
बैंक खातों की जानकारी का हुआ दुरुपयोग
मामले पर पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि कई लोगों ने भरोसे में आकर अपने बैंक खातों से संबंधित जानकारी और क्रेडेंशियल्स कियोस्क संचालक को उपलब्ध करा दिए थे। आरोप है कि इन्हीं जानकारियों का दुरुपयोग करते हुए आरोपी ने रकम अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर ली।
पुलिस के अनुसार बैंक रिकॉर्ड, कियोस्क पोर्टल और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी भी सामने आई है, जिससे ठगी के दायरे और रकम दोनों के बढ़ने की आशंका है।
गुमशुदगी रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी के परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हालांकि पुलिस को संदेह है कि यह रिपोर्ट आरोपी को बचाने या जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से दर्ज कराई गई हो सकती है। इस पहलू की भी गंभीरता से जांच की जा रही है।
जल्द दर्ज होगी FIR
पूरा मामला जीवाजीगंज थाना क्षेत्र में दर्ज शिकायतों से जुड़ा है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच के आधार पर जल्द ही एफआईआर दर्ज कर आरोपी की गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही साइबर टीम को निर्देश दिए गए हैं कि सभी शिकायतों और डिजिटल ट्रांजेक्शनों को एक साथ जोड़कर व्यापक जांच की जाए, ताकि ठगी के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पीड़ितों को न्याय दिलाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।





