रायपुर। छत्तीसगढ़ में वर्षों से लंबित भ्रष्टाचार मामलों पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। एजेंसियों ने एक महीने के भीतर 50 मामलों में चालान या क्लोजर रिपोर्ट अदालत में पेश की है। इनमें राज्य गठन से पहले यानी 1995-96 के 12 पुराने मामले भी शामिल हैं।
वर्षों से लंबित मामलों की हो रही समीक्षा
जानकारी के अनुसार, कई भ्रष्टाचार के मामले वर्षों तक विभिन्न कारणों से लंबित रहे। कुछ मामलों में आरोपियों की मौत हो चुकी थी, जबकि कई मामलों में संबंधित विभागों से अभियोजन की अनुमति नहीं मिल सकी। अब EOW-ACB ने ऐसे सभी पुराने मामलों की समीक्षा तेज कर दी है और जहां आवश्यक है, वहां चालान या क्लोजर रिपोर्ट अदालत में पेश की जा रही है।
30 साल पुराने मामले में भी कार्रवाई
सबसे पुराने मामलों में मध्य प्रदेश सहकारी आवास संघ से जुड़ा कथित फर्जी ऋण घोटाला भी शामिल है। आरोप है कि 186 फर्जी ऋण प्रकरण तैयार कर अस्तित्वहीन समितियों के नाम पर करीब 1.86 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। वर्तमान मूल्य और ब्याज के आधार पर यह राशि 20 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। करीब तीन दशक बाद इस मामले में चालान पेश किया गया है।
लंबित मामलों की संख्या घटी
करीब छह महीने पहले तक EOW में 126 मामले लंबित थे। समीक्षा अभियान के बाद यह संख्या घटकर 90 रह गई है। अधिकारियों का लक्ष्य अगस्त के दूसरे सप्ताह तक लंबित मामलों की संख्या को और कम करना है।
हर मामले की होगी न्यायिक समीक्षा
EOW-ACB के अधिकारियों का कहना है कि सभी लंबित मामलों की कानूनी स्थिति की समीक्षा की जा रही है। जिन मामलों में पर्याप्त साक्ष्य हैं, उनमें चालान पेश किया जा रहा है, जबकि जिन मामलों में कार्रवाई संभव नहीं है, उनमें क्लोजर रिपोर्ट अदालत को भेजी जा रही है। एजेंसी का उद्देश्य वर्षों से लंबित भ्रष्टाचार मामलों का शीघ्र निपटारा करना है।





