सुकमा। रक्षाबंधन के अवसर पर सुकमा पुलिस लाइन में भाई-बहन के रिश्ते, सम्मान और अपनत्व की भावुक तस्वीर देखने को मिली। शहर की महिलाओं और स्कूली बच्चियों ने पुलिस जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और विश्वास जताया। इस दौरान खास पल तब आया, जब सुकमा एसपी मयंक गुर्जर ने भी एक स्कूली बच्ची से अपनी कलाई पर राखी बंधवाई।
राठी मार्ट की महिलाएं और सेमराक स्कूल की बच्चियां पहुंचीं
रक्षाबंधन मनाने के लिए राठी मार्ट सुकमा की महिला कर्मचारी और सेमराक स्कूल की छात्राएं पुलिस लाइन पहुंचीं। उन्होंने जवानों को राखी बांधी और मिठाई खिलाकर त्योहार की खुशियां साझा कीं।
बस्तर के दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में लंबे समय तक परिवार से दूर रहकर ड्यूटी करने वाले जवानों के लिए यह अवसर बेहद खास रहा। बहनों और बच्चियों से राखी बंधवाते समय कई जवान भावुक नजर आए।
राखी के धागे में दिखा सम्मान और अपनापन
स्कूली बच्चियों और महिलाओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सेवा और सुरक्षा के प्रति आभार जताया। परिवार से दूर रहकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे जवानों को इस आयोजन ने घर और परिवार जैसा अपनापन महसूस कराया।
पुलिस लाइन में बच्चियों की मुस्कान और जवानों के चेहरों पर खुशी के साथ भावुकता भी दिखाई दी। यह आयोजन पुलिस और आम नागरिकों के बीच मजबूत होते विश्वास और आपसी जुड़ाव की तस्वीर बनकर सामने आया।
बदलते बस्तर में बढ़ रहा पुलिस और जनता का भरोसा
रक्षाबंधन के इस आयोजन को बदलते बस्तर की तस्वीर के रूप में भी देखा जा रहा है। कभी नक्सली हिंसा और भय से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब आम नागरिकों और सुरक्षा बलों के बीच संवाद और विश्वास बढ़ता दिखाई दे रहा है।
महिलाओं और स्कूली बच्चियों का पुलिस लाइन पहुंचकर जवानों को राखी बांधना शांति, भाईचारे और सामाजिक जुड़ाव का संदेश देता नजर आया।
SP मयंक गुर्जर बोले- सुरक्षा के साथ विश्वास की भी जीत
सुकमा एसपी मयंक गुर्जर ने कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर की दिशा में चल रही यात्रा केवल सुरक्षा की जीत नहीं, बल्कि समाज में विश्वास और अपनत्व की वापसी का भी प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि जवान लंबे समय तक अपने परिवारों से दूर रहकर दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में बहनों और बच्चियों से मिलने वाला स्नेह उन्हें परिवार जैसा अपनापन और भावनात्मक संबल देता है।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर बांधी गई राखी शांति, विश्वास और भाईचारे के उस रिश्ते का प्रतीक है, जो बस्तर में लगातार मजबूत हो रहा है।





